1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. मैं समय का द्वार हूँ

Poem | मैं समय का द्वार हूँ

नितिन फलटणकर

मैं
ND
अतीत से व्यथित हूँ।
वर्तमान से शापित हूँ।
मैं चल रहा अकेला पर,
राहों से स्तब्ध हूँ।

मैं ललकारता, पुकारता
अहंकार से त्रस्त हूँ,
डरपोक हूँ?
मैं निडर हूँ?

भयभीत सा,
सहमा हुआ
मैं समय का द्वार हूँ।
अपनों की चोट हूँ।
किसी नेता का वोट हूँ।

कभी बाँटता,
कभी काटता,
मैं चंचल, अबोध हूँ।

कभी बालक की साँस हूँ।
माँ की अधूरी आस हूँ,
मैं गले की फाँस हूँ।

ND
मैं कौन हूँ,
अदृश्य हूँ।
स्पृश्य हूँ? अस्पृश्य हूँ?

मैं कहाँ इंसान हूँ,
मैं कायर श्मशान हूँ।
अब मुझे चिंता नही,
मैं कहाँ का रोध हूँ।

लोग कहते हैं मुझे,
मैं मनुष्य नहीं, अवरोध हूँ।