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माँ गुजर जाने के बाद
ब्याहता बिटिया के हक में फर्क पड़ता है बहुत छूटती मैके की सरहद माँ गुजर जाने के बाद अब नहीं आता संदेसा मान मनुहारों भराखत्म रिश्तों की लगावट माँ गुजर जाने के बादजो कभी था मेरा आँगन, घर मेरा, कमरा मेरा अब वहाँ अनदेखे बंधन, माँ गुजर जाने के बादअब तो यूँ ही तारीखों पर निभ रहे त्योहार सबखत्म वो रस्मे रवायत, माँ गुजर जाने के बादआए ना माँ की रसोई की वो भीनी सी महक उठ गया मैके का दाना, माँ गुजर जाने के बादवो दीवाली की सजावट, फाग के वो गीत सारे हो गई बिसरी सी बातें, माँ गुजर जाने के बाद
लेखक के बारे में
भारती पंडित