बोलो तुम क्यों आए?
-सहबा जाफरी
सावन की इस सुबहचुपके से यादों मेंबोलो तुम क्यों आए? आंगन में पौधों परफूलों पर, पत्तों परबरसाती खुशबू से मुझ पर ही क्यों छाए खिड़की की चौखट परमौसम की आहट सेबरसाती झोंकों मेंपगलाए वंशीवट सेयमुना के तीरे तीरेश्याम सलोने नटखट सेराधा की पायल से गुंजितवृंदावन के पनघट से स्मृति की नदिया मेंअश्रुपूरित नीरव तट से कालिदास के मेघ सलौनेबोलो! मुझको क्यों भाए? सावन की इस सुबहचुपके से यादों मेंबोलो तुम क्यों आए?