Hindi Poem on Love | बोलो तुम क्यों आए?
-सहबा जाफरी
FILE
चुपके से यादों में
बोलो तुम क्यों आए?
आंगन में पौधों पर
फूलों पर, पत्तों पर
बरसाती खुशबू से
मुझ पर ही क्यों छाए
खिड़की की चौखट पर
मौसम की आहट से
बरसाती झोंकों में
पगलाए वंशीवट से
यमुना के तीरे तीरे
श्याम सलोने नटखट से
राधा की पायल से गुंजित
वृंदावन के पनघट से
स्मृति की नदिया में
अश्रुपूरित नीरव तट से
कालिदास के मेघ सलौने
बोलो! मुझको क्यों भाए?
सावन की इस सुबह
चुपके से यादों में
बोलो तुम क्यों आए?

