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Written By WD

पूनम का चाँद नदी के तल में

पूनम
शोभना चौरे
NDND
पूनम का चाँद नदी के तल में

अपना प्रतिबिम्ब देखकर गर्वित हो गया |

सितारों के झुरमुट के बीच

अपनी रोशनी और तेज कर दी,

नदी थी शांत,

दिन भर की थकी हुई,

चाँद की भावनाओं से अनजान,

चाँद अपने में ही फूला नहीं समा रहा था,

वो अनजान था अब तक,

वो हैरान है अब

क्या नदी ने सचमुच

मुझे अपने

ह्रदय में जगह दी है?

वो मुग्ध हो रहा था,

अपनी उपलब्धि पर

और अपनी किरणों से

नदी को आकर्षित करने की

कोशिश कर रहा था,

क्योकि उसके पास समय था

सिर्फ़ एक दिन।

किंतु नदी थी चिंता में

भोर होने को है,

नाविक पास आते जा रहे हैं

NDND
गायें रम्भाती आ रही हैं

पनिहारिनों की चुडियों की आवाज

कानों में रस घोल रही है,

उसने अपने चिर स्थायी साथियों से कहा,

आओ तुम्हारे बिना मेरा जीवन कहाँ?

नदी ने अपनी लहरें उचकाकर,

तिरछे होकर चाँद को पल भर देखा,

चाँद उसके ह्रदय से ओझल हो गया |
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