पूनम का चाँद नदी के तल में
शोभना चौरे पूनम का चाँद नदी के तल में अपना प्रतिबिम्ब देखकर गर्वित हो गया |सितारों के झुरमुट के बीच अपनी रोशनी और तेज कर दी,नदी थी शांत,दिन भर की थकी हुई,चाँद की भावनाओं से अनजान,चाँद अपने में ही फूला नहीं समा रहा था,वो अनजान था अब तक,वो हैरान है अबक्या नदी ने सचमुचमुझे अपनेह्रदय में जगह दी है?वो मुग्ध हो रहा था,अपनी उपलब्धि परऔर अपनी किरणों से नदी को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था,क्योकि उसके पास समय थासिर्फ़ एक दिन। किंतु नदी थी चिंता में भोर होने को है,नाविक पास आते जा रहे हैं
गायें रम्भाती आ रही हैं पनिहारिनों की चुडियों की आवाज कानों में रस घोल रही है,उसने अपने चिर स्थायी साथियों से कहा,आओ तुम्हारे बिना मेरा जीवन कहाँ?नदी ने अपनी लहरें उचकाकर,तिरछे होकर चाँद को पल भर देखा,चाँद उसके ह्रदय से ओझल हो गया |