आसमान के आंचल से इंद्रधनुष के रंग तेरी तस्वीर में सिमट आते हैं, धुआं-धुआं मौसम में बादल तेरी यादों के बरस जाते हैं, रेशम-सी हो जाती हैं शाम हवा के झोंके जब तुझे गुनगुनाते हैं, भीगे गुलमोहर के रंग क्षितिज के कैनवास पर बिखर जाते हैं, परिंदों के परों पर चढ़कर कुछ सपने ऊंची उड़ान भरते हैं, तेरी आवाज में कुछ शब्द अपने लिए चुरा लाते हैं, और पलकों की कोरों को मोतियों से भर जाते हैं...!