Poem | तुम्हारा न होना याद आया
दीपाली पाटील
ND
आज याद तुम आए
और
याद पहाड़ों का मौसम आया
मखमल-सी हरियाली
उस पर
बूँदों का बिखरना याद आया।
कोहरे में लिपटी बर्फ की चोटियाँ
और गीली लकड़ियों का सुलगना याद आया।
खामोश सी झील में अल्हड बूँदों का,
थरथराना याद आया।
तुम्हारे साथ का एक ख्वाब और
वादियों का सफ़र याद आया।
सिली हवा की मीठी चुभन और
दूर बहते दरिया का शोर याद आया।
मटमैले पानी का तेज बहाव और
लकड़ी का झूलता पुल याद आया।
टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों से गुजरता
मेमनों का काफिला याद आया।
पहाड़ी फूलों की महक और
तुम्हारा न होना याद आया।

