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Written By WD

तुम मेरे घर आकर देखो

ग़ज़ल

ग़ज़ल
विलास पंडित'मुसाफिर'
NDND
अपनी सोच बदल कर देखो
वक्त के साथ ही चलकर देखो।

ख़बर तो रखो दुनिया क्या है
घर से जरा निकल कर देखो।

प्यासों के कुछ काम ना आया
क्या ऐ-खाक समंदर देखो।

सारी बस्ती में मदहोशी है ?
फूल के जैसा पैकर देखो।

तंज़ ज़माने पर करते हो
इक चिंगारी छू कर देखो।

सारे मंज़र मिल जाएँगे
तुम मेरे घर आकर देखो।
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WD