तुझको दिन-रात याद करते हैं
- रोहित जैन
बात बेबात याद करते हैं
भूलकर ज़ात1 याद करते हैं
अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते
लेके बरसात याद करते हैं
तेरे मिलने की दुआ है हर पल
जोड़कर हाथ याद करते हैं
दुश्मनी नींद से हुई अपनी
तुझको हर रात याद करते हैं
मेरे काँधे पे जब तेरा सर था
वो मुलाक़ात याद करते हैं,
उसी इख़लासो मोहब्बत की कसम
वही जज़्बात याद करते हैं
हाल 'रोहित' का क्या बताएँ हम
तुझको दिन-रात याद करते हैं।
1. ज़ात: अस्तित्व, वज़ूद
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भूलकर ज़ात1 याद करते हैं
अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते
लेके बरसात याद करते हैं
तेरे मिलने की दुआ है हर पल
जोड़कर हाथ याद करते हैं
दुश्मनी नींद से हुई अपनी
तुझको हर रात याद करते हैं
मेरे काँधे पे जब तेरा सर था
वो मुलाक़ात याद करते हैं,
उसी इख़लासो मोहब्बत की कसम
वही जज़्बात याद करते हैं
हाल 'रोहित' का क्या बताएँ हम
तुझको दिन-रात याद करते हैं।
1. ज़ात: अस्तित्व, वज़ूद

