जीवन मन का साहस है
भावना सक्सेना
कल काटे-छाँटे वृक्ष कीनग्न शाख पर उतर आया चाँदसहलाता हुआ सापत्रहीन अकेलेपन कोसींचता चाँदनी से......तुम जीवन होफिर हरे-भरे होंगेकल, कल-कल स्वरभर देंगे जीवन,जीवन के आँगन में।कुछ पत्र-पुष्प छँट जाने सेजीवन का सार नहीं चुकताजीवन मन का वह साहस हैजो कभी कहीं नहीं रुकता।