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जलता है वो सूरज सा
दीक्षित दनकौरी अपनों को अपना कर देख जीवन भर पछता कर देख साहिल चल कर आएगा तूफाँ से टकरा कर देख जलता है वो सूरज सा उससे आँख मिला कर देख औरों का भी दर्द समझ खुद से बाहर आकर देख तू मुझको बिसरा देगा अच्छा चल बिसरा कर देख।