गुरुवार, 22 जनवरी 2026
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Written By स्मृति आदित्य

जब तुमने...

फाल्गुनी

हिन्दी प्रेम कविता
जब तुमने...
जब सोचा था तुमने
दूर कहीं मेरे बारे में
यहां मेरे हाथों की चु‍ड़‍ियां छनछनाई थी।
जब तोड़ा था मेरे लिए तुमने
अपनी क्यारी से पीला फूल
यहां मेरी जुल्फें लहराई थी।
जब महकी थी कोई कच्ची शाख
तुमसे लिपट कर
यहां मेरी चुनरी मुस्कुराई थी।
जब निहारा था तुमने उजला गोरा चांद
यहां मेरे माथे की
नाजुक बिंदिया शर्माई थी।
जब उछाला था तुमने हवा में
अपना नशीला प्यार
यहां मेरे बदन में बिजली सरसराई थी।
तुम कहीं भी रहो और
कुछ भी करों मेरे लिए,
मेरी आत्मा ले आती है
तुम्हारा भीना संदेश
मेरे जीवन का बस यही है शेष।