गरीब की लड़की जानती है
पढ़ना चाहेगी तो ब्याह दी जाएगी
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माँ की हिदायत का पालन भी,
नींद में न आ जाए कोई सपना सलोना,
जिसे पाने को मचल पड़े मन की नदी,
अपने प्रवाह को अनियंत्रित करके।
गरीब की लड़की जानती है सीमाएँ अपनी कि
अव्वल तो कोख में ही मार दी जाएगी,
जी गई तो अनचाही सी दुलार दी जाएगी।
पढ़ना चाहेगी तो ब्याह दी जाएगी।
बोझ-सी, दूजे आँगन उतार दी जाएगी।
गरीब की लड़की, फिर भी झपका ही लेती है
उनींदी पलकें, देखने को सुनहले जीवन की।
सुकुमार सपना क्योंकि बचपन में
दादी की कहानी में सुना था, कि
सपने भी कभी-कभी सच हुआ करते हैं।
साभार : लेखिका 08

