- लाइफ स्टाइल
» - साहित्य
» - काव्य-संसार
- कौन गुनगुनाया आज फिर
कौन गुनगुनाया आज फिर
-
सहबा जाफरी मुझको तेरा प्रेम, याद आया आज फिरमेरा अश्रु टूटकर मुस्कुराया आज फिरठेस, यादें, सिसकियाँ,वफा, आँसू, हँसीशब्द में शब्दों को गूँथ गीत गाया आज फिरआत्मा के तीर से दर्द की इक झील देखचंद्रमा मृदु स्मृति का मुस्कुराया आज फिरशेर नग्मे, गीत, दोहे ओ' ग़ज़ल रुबाइयाँमुझमें छुपकर जाने कौन गुनगुनाया आज फिरचाँदनी, जूही, चमेली, केतकी, कचनार फूलइक बसंती शाम ने मुझको रुलाया आज फिरतुझसे बिछुड़कर डूबती चाय के प्यालों में शाम हमने ग़म को भुलाकर मुस्कुराया आज फिर।