poem, | अब समाज से लड़ना होगा
स्वाति दांडेकर
नारी तुम क्यों जलती हो?
क्यों मारती हो अपने आप को
क्या जीना तुम्हारा अधिकार नहीं?
क्या तुम किसी की बेटी या प्यार नहीं?
करों अपने आप से ये सवाल
अपनी दुर्गा शक्ति को पहचान
अब नहीं तुम पुरातन अबला
कहलाई हो सशक्त सबला
तुम किसी की माता हो
उनका तुम पर अधिकार है
उनका हक उन्हें दिलाना होगा
उन्हीं के लिए अब जीना होगा
जब तक अपने अधिकारों को ना जानोगी
यूँ ही प्रताड़ना पाओगी
अब ये सब खत्म करना होगा
खुद को अब समझना होगा
शिक्षा का हथियार उठाकर
अब समाज से लड़ना होगा।
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क्यों मारती हो अपने आप को
क्या जीना तुम्हारा अधिकार नहीं?
क्या तुम किसी की बेटी या प्यार नहीं?
करों अपने आप से ये सवाल
अपनी दुर्गा शक्ति को पहचान
अब नहीं तुम पुरातन अबला
कहलाई हो सशक्त सबला
तुम किसी की माता हो
उनका तुम पर अधिकार है
उनका हक उन्हें दिलाना होगा
उन्हीं के लिए अब जीना होगा
जब तक अपने अधिकारों को ना जानोगी
यूँ ही प्रताड़ना पाओगी
अब ये सब खत्म करना होगा
खुद को अब समझना होगा
शिक्षा का हथियार उठाकर
अब समाज से लड़ना होगा।
