dharma sangrah
Sat, 24 Oct 2026

Notifications

  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. rajnigandha flower

हिन्दी कविता : रजनीगंधा...

rajnigandha flower
प्रतिलिपि कविता सम्मान हेतु
 
रजनीगंधा फूल-सा, 
महक उठा संसार। 
प्रिय संगम ऐसा हुआ, 
तन पर चढ़ा खुमार। 
 
तन पर चढ़ा खुमार, 
प्रमुदित हृदय का आंगन। 
रजनीगंधा खिला, 
आज जीवन के मधुवन। 
 
कह सुशील कविराय, 
खिला तन प्रेम सुगंधा। 
अनुपम रूप अनूप, 
देह है रजनीगंधा। 
 
रजनीगंधा की महक, 
फैली चारों ओर। 
प्रीतम मादक हो रहे, 
चला नहीं कछु जोर। 
 
चला नहीं कछु जोर, 
बांह जरा ऐसी जकड़ी। 
तन में उठत मरोड़, 
कलाई ऐसी पकड़ी। 
 
कह सुशील कविराय, 
प्रेम बिन जीवन अंधा। 
मृदुल प्रेम प्रिय संग, 
मन बना रजनीगंधा। 
 
 
ये भी पढ़ें
कविता : हवाएं करती हैं प्रतीक्षा