कविता : मां मैं हूं तेरी प्रिय दुलारी

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ममता भारद्वाज  मां मैं हूं तेरी प्रिय दुलारी 
तेरे आंगन की सबसे प्यारी
मुझे दिखा कर दुनिया सारी
उन्हीं से कर दी क्यों मुझे पराई?
मां प्यार मुझे वो फिर तु दे दे
उस आगन में तु मुझे बुला ले
तेरे नजरों से ओझल होकर 
वो सुख चैन कहा में पाऊंगी 
 
बिन बोले पीरा तू जो समझे
वो दूजा कोई समझ ना पाएगा
नाजों से जो तुने मुझको है पाला
उसकी कद्र कौन भला कर पाएगा
 
जिन आखों ने ममता देखी
आज उसमें पीर समाई मां
तेरी यादें बहुत सताती हैं
तब अखियां जल बरसाती हैं
 
मां प्यार मुझे वो फिर तूू दे दे
आंचल में बस मुझे छिपा ले
मां मैं हूं तेरी प्रिय दुलारी
उस आंगन की सबसे प्यारी



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