गुरुवार, 3 अप्रैल 2025
  • Webdunia Deals
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. hindi Poetry

हिन्दी कविता : अब मानव मन के काले हैं

हिन्दी कविता
हर नदियों का पानी धूमिल,
हर पवन वेग में छाले हैं। 
हर दिल में लालच बसी है,
अब मानव मन के काले हैं।।
मधुर वचन से डस लेते हैं,
पर कट जाते हैं राही के।
मैं समझ न पाया जीवन लय को,
मन पूछ रहा हमराही से।।
 
ऊंचे सिंहासन जो बैठे हैं, 
वे भी गुंडे पाले हैं। 
अब मानव मन के काले हैं... 
ये भी पढ़ें
बच्चों की कविता : कु्त्ता भौं-भौं करता है