हमेशा की तरह ही त्रस्त हैं लोग सूखते रिश्तों से आंखों के घटते पानी से और गिरते भू जल स्तर से। रिश्ते और पानी जीवन है इनका निरंतर घटते रहना सिर्फ घटना ही नहीं है, यह है हमारी उस प्रवृत्ति का प्रतिफल जिसने हमें बना दिया है प्रकृति और...