मातृभाषा हिन्दी पर महापुरुषों के विचार

हिन्दी हम सबकी भाषा है। जन-जन की भाषा है। हिन्दी के लिए बड़े-बड़े विद्वानों ने समय-समय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। आइए जानते हैं क्या कहते हैं हिन्दी के लिए महापुरुष..... 
 
 
हिन्दी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। - ग्रियर्सन
 
संस्कृत माँ, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। - डॉ. फादर कामिल बुल्के
 
राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी
 
हृदय की कोई भाषा नहीं है, हृदय-हृदय से बातचीत करता है। - महात्मा गाँधी
 
हिंदुस्तान के लिए देवनागरी लिपि का ही व्यवहार होना चाहिए, रोमन लिपि का व्यवहार यहाँ हो ही नहीं सकता। - महात्मा गाँधी
 
हिन्दी भाषा के लिए मेरा प्रेम सब हिन्दी प्रेमी जानते हैं। - महात्मा गाँधी
 
हिन्दी भाषा का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है। - महात्मा गाँधी
 
राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है। - महात्मा गाँधी
 
अखिल भारत के परस्पर व्यवहार के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे जनता का अधिकतम भाग पहले से ही जानता-समझता है। - महात्मा गाँधी
 
यह महात्मा गाँधी का प्रताप है, जिनकी मातृभाषा गुजराती है पर हिन्दी को राष्ट्रभाषा जानकर जो उसे अपने प्रेम से सींच रहे हैं। - लक्ष्मण नारायण गर्दे




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