6 तरह से होते हैं आपके ‘दिल पर अटैक’, जानिए उनके ‘लक्षण’ जिससे समय पर हो सके ‘बचाव’

types of heart attack
नवीन रांगियाल| Last Updated: मंगलवार, 12 जनवरी 2021 (13:49 IST)
आजकल कोरोना संक्रमण काल में कई लोगों की जान दिल के दौरे की वजह से भी जा रही है। हाल ही में कुछ डॉक्‍टरों के मुताबि‍क ऐसे लोगों की भी मौतें हुई हैं जिनकी उम्र 40 या 45 से भी कम थी।
आइए जानते हैं कितने तरह के हार्ट अटैक होते हैं और उनके लक्षण क्‍या हैं।

1. उच्च रक्तचाप (Hypertension)
हृदय रोग की सबसे आम टाइप में से एक है हाई ब्लडप्रेशर या हाइपरटेंशन। सामान्य स्थितियों में खून ब्लड वेसेल्स की दीवारों पर एक विशिष्ट दबाव डालता है, जिसे ब्लडप्रेशर कहा जाता है। कई स्थितियों में यह प्रेशर इतना ज्यादा हो सकता है कि शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगे। यह धमनियों में घूम रहे खून की की मात्रा बढ़ने या धमनियों के व्यास में कमी आने से हो सकता है।

लक्षण
इस स्थिति के कारण कोई विशिष्ट लक्षण नहीं होते। बहुत से लोग इसे जाने बिना भी पीड़ित हो सकते हैं। हालांकि कुछ रोगियों को कई लक्षणों का सामना करना पड़ता है। उनमें सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ और नाक से खून आना शामिल हैं।

2. कॉरेनरी हृदयरोग (CHD)
कॉरेनरी हृद रोग एक ऐसी स्थिति है जो हृदय में खून भेजने वाली धमनियों पर असर डालता है। कई कारणों से ब्लड वेसेल्स के लुमेन को कम हो जाते हैं जिससे दिल को ऑक्सीजन और खून नहीं मिलता। इस बीमारी की सबसे आम जटिलताओं में से एक है मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (myocardial infarction, MI) जिसे हार्ट अटैक या दिल का दौरा भी कहा जाता है। यह तब होता है जब धमनी पूरी तरह से ब्लाक हो जाती है। इसका अर्थ है अपर्याप्त ब्लड सप्लाई। नतीजतन कोशिकाओं में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होता और वे मिनटों में मर जाती हैं।

लक्षण
कॉरेनरी हृदयरोग का मुख्य लक्षण एनजाइना पेक्टोरिस या सीने में दर्द है। ज्यादातर मामलों में यह तेज फिजिकल एक्टिविटी के बाद उभरता है, छाती के बीचोंबीच होता है, चलने-फिरने में रुकावट डालता है और आमतौर पर कुछ मिनटों के आराम के बाद गायब हो जाता है।
सीने में दर्द
थकान
सांस लेने में कठिनाई
पूरे शरीर में कमजोरी
सिरदर्द
सिर चकराना (Dizziness)

3. हार्ट फेल्योर
दिल की बीमारी के सबसे गंभीर टाइप में से एक हार्ट फेल्योर है। यह एक डायग्नोस्टिक ​​सिंड्रोम है जिसमें हृदय प्रभावी रूप से पंप नहीं कर पाता जिससे हृदय या अपर्याप्त हृदय उत्पादन होता है। दूसरे शब्दों में, कार्डियक आउटपुट अपर्याप्त है। आमतौर पर जब हार्ट फेल्योर होता है, तो वेंट्रिकल मसल बहुत कमजोर हो जाती है। इसलिए यह सही ढंग से सिकुड़ नहीं पाता। इसकी संरचना या फंशन में कई बदलाव इसका कारण बन सकते हैं। दरअसल यह कुछ हार्ट कंडीशन का अंतिम स्टेज है।

लक्षण
सांस लेने में कठिनाई
लेटते समय सांस लेने में असमर्थता
गुलाबी बलगम वाली खांसी
निचले अंगों की सूजन
थकान
जलोदर (Ascites)

4. जन्मजात हृदय रोग (Congenital heart disease)
बच्चों में हृदय की समस्याओं के सबसे आम कारणों में से एक जन्मजात हृदयरोग है। वे संरचनात्मक जन्म दोष हैं जो गर्भावस्था में ही हो जाते हैं, जब बच्चे का दिल बन रहा होता है। इस तरह वे अकेले नहीं बल्कि खामियों का पूरा समूह होते हैं।

लक्षण
जन्मजात हृदयरोग के लक्षण आमतौर पर जन्म के बाद शुरुआती दिनों में दिखाई देते हैं। उनमें से कुछ हैं, तेजी से सांस लेना है, बैंगनी होंठ, फीडिंग में कठिनाई और ग्रोथ से जुडी समस्याएं। दूसरी ओर जो लोग जन्मजात विकृति के साथ पैदा हुए थे और वयस्कता तक पहुंचते हैं, वे एरिद्मिया (arrhythmia), सांस की तकलीफ, त्वचा की खराबी, थकान और निचले अंगों में सूजन से पीड़ित होते हैं।

5. रयूमेटिक ह्रदय रोग (Rheumatic heart disease)
विभिन्न प्रणालीगत रोग हृदय पर असर डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए रयूमेटिक फीवर (Rheumatic fever) या आमवाती बुखार। यह एक तरह का हृदयरोग है जो उस स्टैफिलोकोकस स्ट्रेन (staphylococci) के कारण उभरता है जो कनेक्टिव टिशू पर हमला करता है, जिससे ऑटोइम्यून रिएक्शन होता है। इस तरह यह मांसपेशियों और हृदय के वाल्व को प्रभावित करता है, जिससे रयूमेटिक ह्रदय रोग के मामलों में बहुत नुकसान होता है। ये नुकसान इतने गंभीर होते हैं कि वे गंभीर हार्ट फेल्योर और यहां तक ​​कि मौत का कारण बन सकते हैं।

लक्षण
बुखार जो 101 °F से ज्यादा न हो
मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द
सामान्य कमज़ोरी
उल्टी
गठिया

6. कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathies)
कुछ हृदयरोग, जैसे जन्मजात हृदयरोग में सर्जरी की जरूरत होती है।
कार्डियोमायोपैथी ऐसे हृदयरोग हैं जो दिल की मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं। वे इसे बनाने वाली कोशिकाओं के आकार और वितरण को संशोधित करते हैं। इस तरह हृदय में बदाव आ जाता है। कार्डियोमायोपैथियों की तीन सबसे आम टाइप डायलेटेड, हाइपरट्रॉफिक और प्रतिबंधक हैं। पहले में वेंट्रिकल बढ़े हुए हैं। दूसरे में वेंट्रिकुलर दीवार मोटी हो जाती है। अंत में, प्रतिबंधात्मक कार्डियोमायोपैथी तब होती है जब हृदय की दीवारें (वेंट्रिकल) कनेक्टिव टिशू की घुसपैठ के कारण कठोर होती हैं।

लक्षण
फिजिकल एक्टिविटी के बाद सांस की तकलीफ
निचले अंगों की सूजन
थकान
दिल की घबराहट
चक्कर आना और बेहोशी



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