वर्ष 2020 में कोरोना ने बदली लाइफस्टाइल,20 बड़ी बातें

नेहा रेड्डी|

वर्ष 2020 एक ऐसा साल रहा जिसे शायद ही भविष्य में कोई भुला पाएगा। इस साल ने ऐसे सबक सिखाए हैं जिसके बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं था। कोरोना महामारी ने मानो जीवन में उथल-पुथल मचा रखी है। इस वायरस ने जीवन की रफ्तार पर ब्रेक-सा लगा दिया है। भागती-दौड़ती जिंदगी मानो झटके से रुक-सी गई। सब अपने-अपने घरों में कैद हो गए। घर के बाहर निकलना मानो जान हथेली पर रखकर मौत का सामना करने के समान हो गया। ऐसी परिस्थिति में इस गाने की कुछ पक्तियां बिलकुल सटीक बैठती है, 'ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारो, खो रहा चैन-ओ-अमन, मुश्किलों में है वतन...।'
कोविड-19 के कारण लॉकडाउन हुआ ताकि लोगों की जान इस महामारी से बच सकें। इसका सभी ने बखूबी पालन भी किया। अपने-अपने घरों में कैद लोग शायद ही कभी इतने लंबे वक्त तक घर की चारदीवारी में कैद हुए होंगे। उनके लिए ये अनुभव बेहद अलग रहा। पढ़ाई, ऑफिस का काम, रिश्ते-नाते ये सब सिर्फ एक चारदीवारी के अंदर कैद थे जिसका असर साफतौर पर देखा जा सकता है। हम सब अपने ही घर में कैदियों की तरह बंद थे। अगर घर से बाहर निकले तो कोरोना की चेपट में आ जाएंगे। मानो पूरे वक्त यही बात मन में घूम रही हो। कोरोना ने हम सबकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। वर्ष 2020 में कोरोना से दिनचर्या में काफी बदलाव हुए...। आखिर वो क्या बदलाव रहे जिसने पर काफी असर डाला है, आइए जानते हैं...
माना कि कोरोना का दौर बेहद मुश्किलोंभरा रहा है। लेकिन कहते हैं कि न हर बुरी परिस्थितियां कुछ अच्छा सबक जरूर सिखाकर जाती हैं। बस ये आपके नजरिए पर निर्भर करता है कि पानी का गिलास आधा भरा है या आधा खाली...? ऐसी कौन-सी महत्वपूर्ण बातें हैं, जो हमें कोरोना ने सिखाई व समझाई हैं?

1. सेहत का महत्व

कोरोना से पहले शायद ही हम पलभर बैठकर अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचते होंगे। कुछ सोचते थे तो यही कि सिर्फ जिंदगी की रफ्तार के साथ कैसे दौड़ें? लेकिन कोरोना काल में सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी है, ये बात बखूबी समझ में आ गई कि अगर स्वस्थ रहेंगे तो जिंदगी की हर मुश्किलों का सामना आसानी से किया जा सकता है। वैसे भी कहते हैं न कि 'स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है'। इसलिए स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
2. कम संसाधनों में खुश रहना

हम अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए दिन-रात महनत करते रहते हैं, लेकिन आवश्यकता कम नहीं होती है बल्कि हर दिन बढ़ती जाती है। लेकिन कोरोना ने कम संसाधनों में भी हमें खुश रहना सिखा दिया है।

3. एक-दूसरे के लिए समय

कोरोना से पहले एक-दूसरे की तकलीफ समझने का भी लोगों के पास समय नहीं था। हर बार बस यही शिकायत कि 'समय नहीं है'। लेकिन कोरोना में हुए लॉकडाउन से हमने अपना सारा समय घर पर बिताया। अपने परिवार के साथ एक बेहतर समय और क्वॉलिटी टाइम स्पेंड किया। एक-दूसरे की शिकायत को समझा और अपने रिश्तों को पहले से ज्यादा मजबूत किया।
4. एक-दूसरे की तकलीफ को समझा

कोरोना काल में लोग एक-दूसरे की तकलीफ को महसूस कर रहे हैं। उन्हें समझने और उनकी मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। रिश्तों के महत्व को बखूबी समझकर एक-दूसरे की तकलीफों को दूर करने के लिए आगे आ रहे हैं।

5. वर्क फ्रॉम होम कल्चर

हमारे देश में वर्क फ्रॉम होम करना मुश्किल माना जाता है। भला बिना ऑफिस आए घर से काम कैसे करना संभव हो सकता है? ये सोच कोरोना काल से पहले थी। लेकिन कोरोना काल में अब वर्क फ्रॉम होम मुश्किल न होकर एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है, क्योंकि इसके बाद से अभी भी अधिकतर लोग अपने घर से काम कर रहे हैं और अच्छी परफॉर्मेंस दे रहे हैं। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्क फ्रॉम होम का कल्चर भी सक्सेसफुल हो सकता है।
6. ऑनलाइन क्लासेस

क्या कोरोना काल से पहले बिना स्कूल जाए पढ़ाई के बारे में किसी ने सोचा था? लेकिन कोरोना काल में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, टीचर्स और स्टूडेंट्स दोनों ही अपने काम को बहुत बेहतर तरीके से पूरा कर रहे हैं।

7. योग के प्रति झुकाव

कोरोना काल में स्वास्थ्य के प्रति कितने सजग रहने की जरूरत है, ये बात अब किसी से छुपी नहीं है। जो लोग कोरोना काल से पहले शायद ही कभी अपनी सेहत के लिए ज्यादा चिंतित रहते होंगे, वे भी अब खुद को फिट रखने के लिए योग व प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं ताकि वे स्वस्थ और निरोगी रह सकें।
8. बिना जिम जाए फिटनेस

कोरोना से पहले फिटनेस यानी आपको जिम जाकर घंटों पसीना बहाना होता था। लेकिन के कारण लगे लॉकडाउन में जिम जाने की भी परमिशन नहीं थी इसलिए महीनों जिम भी बंद रहे। इस वजह से लोगों ने घर में ही खुद के लिए व्यायाम का समय निकाला और खुद को फिट रखने के लिए मेहनत शुरू की।
9. घर के काम मिल-जुलकर

कोरोना ने वाकई दिनचर्या में काफी बदलाव किया है। बात चाहे आपके ऑफिस के काम की हो या घर के काम की। पहले जहां घर के काम की जिम्मेदारी सिर्फ घर की महिलाओं पर ही हुआ करती थी, वे काम अब कोरोना काल में घर के अन्य सदस्य भी मिल-जुलकर कर रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम में पति और पत्नी दोनों ही घर से ही काम कर रहे हैं इसलिए अपने ऑफिस और घर के काम को दोनों मिलकर अच्छी तरह से मैनेज कर रहे हैं।
10. 'नमस्ते' से शुरुआत

अब 'हैलो' या गले लगने की जगह 'नमस्ते' करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने हाथ मिलाने की आदत से दूरी बनाने की सलाह दी, क्योंकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी में हाथों के जरिए वायरस फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

कोरोना काल में सबसे बड़ा बदलाव ऑफिस कल्चर में देखा गया। इस संक्रमण पर काबू पाने के लिए कई बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ऑफिस के बजाय घर से काम करने के लिए कहा जिससे कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके। अब यह धीरे-धीरे हमारी जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है।
11. सफाई पर विशेष ध्यान

कोरोना से पहले भी लोग सफाई पर ध्यान तो देते थे लेकिन कोरोना काल में सफाई पर विशेष रूप से ध्यान देने लगे हैं। यानी बाहर से लाई गईं सब्जियां व फल भी अच्छी तरह से साफ करके ही घर के अंदर लाई जाती हैं ताकि वायरस से दूर रह सकें। व्यक्तिगत हाइजीन के साथ-साथ अपने घर व कपड़ों आदि सभी की हाइजीन पर बहुत अच्छे तरीके से ध्यान दे रहे हैं। वाकई कोरोना से लाइफस्टाइल में काफी बदलाव हुआ है।
12. सड़कों पर गंदगी पर रोक

हम अपने-अपने घरों की तो बेहद अच्छे तरीके से साफ-सफाई करते हैं, लेकिन सड़कों का क्या? सड़कों पर गंदगी फैलाने, थूकने व कचरा इधर-उधर गिराने से नहीं चूकते थे। पर कोरोना काल में हम इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि गंदगी होने से इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इसलिए अब इस बात को लोग समझ रहे हैं और घर के बाहर भी साफ-सफाई का ख्याल रख रहे हैं।
13. कोरोना काल में लोगों ने की जरूरतमंदों की मदद

कोरोना काल में लोगों में इंसानियत देखने को मिली। जरूरतमंदों की मदद करने से इंसान नहीं चूका। बेरोजगारों और निर्धन वर्ग की मदद इस समय सरकार के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी काफी की गई।

14. आस-पड़ोस की सुध रखना

व्यस्त दिनचर्या के चलते आस-पड़ोस की सुध रखना भी काफी मुश्किल होता था। सब खुद में ही बिजी रहना पसंद करते थे, लेकिन कोरोना काल में अब आस-पड़ोस के लोगों से दूर से ही सही, लेकिन हालचाल जरूर पूछे जाते हैं।
15. ऑनलाइन शॉपिंग को किया लोगों ने पसंद

कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिग का ख्याल रखते हुए लोगों ने घर से बाहर जाना उचित नहीं समझा, ऐसे में अधिक समय घर पर रहने और ऑनलाइन शॉपिंग को लोगों ने ज्यादा पसंद किया।

16. जंकफूड से दूरी हेल्दी डाइट है ज्यादा जरूरी

कोरोना पहले अधिकतर लोग घर के खाने की अपेक्षा बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते थे। लेकिन अब कोरोना काल में इस आदत में काफी बदलाव देखा गया है। अब बाहर के खाने की जगह घर के फ्रेश और पौष्टिक आहार को ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
17. परिवार के साथ समय

जो माता-पिता या जो बच्चे अपने माता-पिता के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते थे, वे अब अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता रहे हैं। जिससे ये बात बखूबी समझ आई कि परिवार के साथ समय बिताना कितना जरूरी है। इससे रिश्ते मजबूत और रिश्तों में पॉजिटिव बदलाव भी होते हैं।

18. फैशन में बदलाव

कोरोनावायरस से जब लोग घर से काम करने लगे हैं तो इसका असर पहनावे पर भी नजर आया, क्योंकि ऑफिस, बैंक या अन्य कार्यस्थल तो जाना नहीं है तो लोग अब जींस, पेंट-कोट यानी किसी प्रोफेशनल आउटफिट की जगह आरामदायक कपड़ों को पहनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जैसे टी-शर्ट और पायजामा। महिलाएं नाइटी या आरामदायक घर में पहने जाने वाले कपड़े पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं।
19. मास्क लगाना है ज्यादा जरूरी

चेहरे पर मास्क लगाना हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। अब घर से बाहर निकलने पर जैसे आप 'मोबाइल रखा है कि नहीं?' चेक किया करते थे या किसी अन्य जरूरी सामान को चेक करते थे, अब मास्क भी उसी फेहरिश्त में शामिल है।

20. नई-नई रेसिपी का बढ़ा क्रेज

कोरोना काल में जो लोग जंक फूड को बहुत ज्यादा पसंद किया करते थे, वे अब बाहर से लाए गए व्यंजन को चखने से पहने सोचने लगे हैं। इसके लिए घर पर ही तरह-तरह की डिशेज बनाई जा रही हैं। नई-नई रेसिपी के लिए लोग इंटरनेट पर भी खूब सर्च कर रहे हैं, वहीं किचन से दूरी बनाकर रखने वाले लोग भी अब शेफ बनकर उभर रहे हैं।



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