हरिद्वार कुंभ : धर्म ध्वजा के लिए छिद्दरवाला के जंगल में वृक्ष चिह्नित

निष्ठा पांडे| पुनः संशोधित सोमवार, 1 फ़रवरी 2021 (21:01 IST)
हरिद्वार। में अखाड़ों को उनकी धर्म ध्वजा के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की परंपरा के तहत छिद्दरवाला के जंगल में वृक्ष चिह्नित कराने के लिए कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत अखाड़ों को साथ लेकर गए। रावत ने इस अवसर पर कहा कि धर्म ध्वजा के लिए वृक्ष की निशानदेही हो गई है। इसको उचित समय पर जैसा हमें बताया जाएगा, अखाड़ा परंपरा का पालन करते हुए ध्वजा के लिए वृक्ष को पहुंचा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत ज्यादा है। अखाड़ों की छावनियों में स्थापित होने वाली धर्म ध्वजाओं को लगाने के लिए 52 हाथ की लकड़ी का प्रयोग किया जाता रहा है। अखाड़ों की छावनियों में स्थापित होने वाली धर्म ध्वजाओं को लगाने के लिए 108 फीट से 151 फीट तक की लकड़ी का प्रयोग किया जाता रहा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सभी 13 अखाड़ों के प्रमुखों ने धर्म ध्वजा के लिए लकड़ियों का चयन कर लिया है।

इस अवसर पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि,
महंत महेश्वर दास, महंत रवींद्र पुरी, महंत राम रतन गिरि, महंत रवींद्र पुरी, कोठारी महक दामोदर दास,अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह, उप मेलाधिकारी किशन सिंह नेगी सहित समस्त तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद थे।

गंगा तट पर बसे गांव-शहरों में गंगा आरती के फैसले का स्वागत : उत्तर प्रदेश सरकार के बिजनौर से बलिया तक गंगा तट पर बसे हर गांव-शहर में गंगा आरती कराए जाने के फैसले का अखाड़ा परिषद ने स्वागत किया है।अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने हरिद्वार में योगी सरकार के गंगा आरती कराए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए मांग की है कि गंगोत्री से गंगा सागर तक जहां से भी गंगा निकलती है वहां के सभी मुख्यमंत्रियों को ऐसा ही निर्णय लेना चाहिए। इस फैसले से गंगा साफ और स्वच्छ हो सकेगी।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि योगी के इस फैसले से लोगों में गंगा के प्रति आस्था और प्रगाढ़ होगी। सरकारों के इस तरह के फैसलों से गंगा जल्द ही गंगोत्री से गंगा सागर तक साफ और स्वच्छ हो सकेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजनौर से बलिया तक गंगा के दोनों किनारों पर बसे 1038 गांवों को नए आरती स्थल के तौर पर चुना है।
इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।

योजना के तहत बिजनौर से लेकर बलिया तक गंगा के पांच किलोमीटर के इलाके में दोनों किनारों पर बसे गांवों में नए आरती स्थलों के निर्माण की प्रक्रिया पर्यटन विभाग के सहयोग से शुरू होगी।
नए आरती स्थलों को जन सहभागिता के आधार पर संचालित किया जाएगा। रोज तय समय पर गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा।

केन्द्रीय एसओपी का डमरू बजाकर विरोध : के आयोजन पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्रालय की भारी-भरकम एसओपी का प्रान्तीय उद्योग व्यापार मण्डल हरिद्वार ने डमरू बजाकर विरोध किया।अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए व्यापारियों ने कहा कि कुंभ मेला नाम ही हिन्दू समुदाय की विश्वव्यापी पहचान है, यह हिन्दू पर्व संस्कृति अध्यात्मिक श्रद्धा और आस्था का महापर्व है।

केन्द्र की इतनी बड़ी-बड़ी रैलियां हो रही हैं, उसमें कोरोना नहीं हो रहा। उनका कहना था कि इतनी भारी-भरकम गाइड लाइन लागू कर दी गई तो हरिद्वार का व्यापारी और व्यापार पंगु हो जाएगा। इसका लाभ केवल भ्रष्ट तंत्र को होगा, जो कि जनता की खून-पसीने की कमाई को कुंभ के नाम पर हजम कर जाएंगे।

व्यापारियों ने स्वास्थ्य मंत्रालय की एसपीओ गाइड लाइन को अनुचित ठहराते हुए इसे सरल बनाने और स्थल पर श्रद्धालुओं का कोविड टीकाकरण करवाने की मांग की।व्‍यापार मंडल के महामंत्री संजय त्रिवाल ने कहा कि यह एसपीओ गाइड लाइन महज़ कुंभ मेला फेल करवाने के साथ-साथ हरिद्वार का व्यापार चौपट करने के साथ ही बर्बाद करने की एसपीओ है।जब कुंभ मेले में श्रद्धालु नहीं आएंगे तो कुंभ मेले की तैयारी कैसी और यह भारी-भरकम तामझाम कैसा।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार का व्यापारी इसका विरोध करता है व प्रशासन द्वारा व्यापारियों को बार-बार भ्रमित किया जा रहा हैं।उन्होंने कहा कि कुंभ पर्व हिंदू श्रद्धालुओं की आत्मा की शुद्धि और श्रद्धा का महापर्व है, अगर इसमें पूजा पाठ के लिए अनुमति लेनी होगी तो यह एक हिटलरी फरमान होगा इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।उन्होंने कहा कि जब कोरोना की वैक्सीन आ गई है तो प्रवेश से पूर्व ही श्रद्धालुओं को स्थल पर ही वैक्सीन लगा दी जाए।



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