गुजरात में 'गुजसीटोक' से हटेंगी आतंकी धाराएं, खत्म होगा लीगल क्लैश
gujarat budget session: गुजरात की सुरक्षा ढाल माने जाने वाले 'गुजसीटोक' (GUJCTOC) कानून में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 16 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में राज्य सरकार एक ऐसा संशोधन विधेयक ला रही है, जिससे अब आतंकवाद से जुड़े मामलों का निपटारा नए केंद्रीय कानून (BNS) के जरिए होगा। आखिर इस बदलाव के पीछे की असली रणनीति क्या है और इससे अपराधियों पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं।
क्यों बदला जा रहा है कानून?
केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में आतंकवाद को पहले ही परिभाषित और शामिल किया जा चुका है। ऐसे में एक ही अपराध के लिए राज्य और केंद्र के दो अलग-अलग कानून भ्रम पैदा कर रहे थे। इसी 'लीगल क्लैश' को खत्म करने के लिए गुजरात सरकार ने यह साहसिक कदम उठाया है। अब आतंकवाद के लिए दिल्ली वाला कानून चलेगा और गैंगस्टरों के लिए गुजरात का अपना 'गुजसीटोक'।
दरअसल, आतंकवाद के मामलों में अब दोहरी जांच की उलझन खत्म होगी। पुलिस और एजेंसियों के लिए जांच की प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और सटीक होगी। इस संभावित बदलाव को भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह आए 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के साथ तालमेल बिठाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि गुजसीटोक अब मुख्य रूप से 'गैंगवार' और 'ड्रग तस्करी' जैसे संगठित अपराधों पर प्रहार करेगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala