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Written By ND

हैपी बर्थ डै ऐश !

हैपी बर्थ डै ऐश !
- देवेंद्र

आगरा नगरी हो गई
आज अचानक धन्य ।
सभ्य लोग भी हो चले
नियम तोड़कर वन्य ।।

ताजमहल की छटा में
आया अजब निखार।
गली-गली बहने लगी
मादक, मस्त बयार।।

मदन सेठजी झूम-झूम
लुटा रहे हैं पेठा।
नगर पधारीं ऐश्वर्या,
मुँह मीठा कर लो बेटा।।

ऐश्वर्या के दीवानों को
लगाव उनसे गहरा
हाय मगर है मजबूरी।
लगा है भारी पहरा।।

उस खुशकिस्मत की आँखों की
देखते बनती लाली।
जिसने 'ऐश देवी' की झलक है
किसी तरह से पा ली ।।

आज बर्थ डे ऐश का,
आगरा नगरी हो गई आज अचानक धन्य । सभ्य लोग भी हो चले नियम तोड़कर वन्य ।। ताजमहल की छटा में आया अजब निखार।

आगरा में है उत्सव।
ऐसे में ना अमरसिंह हों,
ऐसा कैसे संभव?

नाजो-अदा की वो मलिका
जब काट चुकेगी केक ।
दाढ़ीयुक्त मुस्कान लिए
देंगे बधाई अभिषेक।।

उधर बोलते बनवारी,
गजब हो गया बाबू।
ऐश मैडम में है जरूर
कोई पावरफुल-सा जादू।।

वो चौंतीस की क्या हुईं,
हुई जादुई बात।
देखो; मेरी बत्तीसी में
दो और उग आए दाँत।।
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ND