गुरुवार, 5 मार्च 2026
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Written By WD

लायसेंस

- एमके सांघी

हास्य व्यंग्य
ND

काका- क्यों भई वेबू, बहुत दिनों बाद दिखाई दिए हो। तुम तो मानो ईद का चाँद ही हो गए हैं।
वेबू- काका मुझसे कुछ न कहो। मेरा खून खौल रहा है।

काका- वेबू की कलाई थामते हुए, कहाँ खौल रहा है...। तुम्हारा टेम्प्रेचर तो एकदम नॉर्मल है।
वेबू- खीजते हुए, काका खून खौलने से मेरा मतलब मुहावरे से था।

काका- हँसते हुए, ऐसी क्या बात हो गई जिसका तुम तिल का ताड़ बना रहे हो।
वेबू- काका बात तिल नहीं पूरी की पूरी ताड़ के बराबर है।

काका- वेबू, तुम बात की इतनी लंबी भूमिका क्यों बना रहे हो। जल्दी से मतलब की बात क्यों नहीं कहते। व्यक्ति को थोड़े शब्दों में अधिक कहना चाहिए जैसे कि 'गागर में सागर।'
वेबू- काका बात यह है कि पापा ने मुझे स्कूटर चलाने से मना कर दिया है।

काका- वह क्यों?
वेबू- क्योंकि मेरी उम्र अभी 18 वर्ष से कम है और मेरे पास लायसेंस नहीं है। मुझे लगत‍ा है कि अब सीधी ऊँगली से घी नहीं निकलेगा। मुझे भूख हड़ताल करनी पड़ेगी।

WD
काका- वेबू बेटा यह तो गलत बात है। पापा ठीक कहते हैं। बिना लायसेंस तुम्हें स्कूटर नहीं चलाना चाहिए। तुम्हारी बात तो ऐसी है जैसे उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।
वेबू- काका यह लायसेंस वायसेंस एकदम सेंसलेस बात है। जब मुझे स्कूटर चलाना अच्छी तरह आता है तो क्यों नहीं चलाऊँ। हाथ कंगन को आरसी क्या? लो मैं अभी आपको बाजार घुमा कर लाता हूँ।

काका- वेबू, बात यह नहीं है कि तुम्हें स्कूटर चलाना आता है या नहीं। बात सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के पालन की है।
वेबू- काका आप नियमों की बात करते हैं। नियम रोज इस तरह तोड़े जाते हैं कि चोर दाढ़ी में तिनके की बजाए लोगों की पूरी की पूरी दाढ़ी तिनकों की नजर आती है।

काका- वेबू जो नियमों की परवाह नहीं करते उन्हें जाने दो। तुम्हें जल में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं करना चाहिए। माना ‍तुम अनेक बार पुलिस की आँखों में धूल छौंक सकते हो मगर किसी भी दिन बिना लायसेंस गाड़ी चलाते पुलिस ने पकड़ लिया तो मुश्‍किल में फँस जाओगे। और यदि कभी गाड़ी से कोई एक्सीडेंट हो गया तो तुम्हारी हालत धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का जैसी हो जाएगी।
वेबू- काका आपकी बात मुझे ठीक लग रही है। मेरे दोस्त जो बिना लायसेंस स्कूटर चलाते है उन्होंने मुझे ऐसे सब्जबाग दिखाएँ कि मुझे गलत काम में भी मजा ही मजा नजर आने लगा।

काका- चलो मैं तुम्हें आइसक्रीम खिलाता हूँ।
वेबू- वाह काका! यह तो एक पंथ दो काज वाली बात हो गई। ज्ञान का ज्ञान और मुफ्त की आइसक्रीम।