- मनोरंजन
» - गुदगुदी
» - हास्य व्यंग्य
रंग नहीं चढ़ता मुखौटों पर
-
महेन्द्र सांघी सुना था कि होली के दिनदुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं। रंगों से लैस होकर हम निकलेसोचा, दुश्मनों से होली खेल आते हैं।न उन पर रंग चढ़ा, न हम परसभी बेरंग ही घर लौटेहमारी तरह उन्होंने भी चेहरे परपहन रखे थे दोस्ती के मुखौटे।