1. मनोरंजन
  2. »
  3. गुदगुदी
  4. »
  5. हास्य व्यंग्य
Written By WD

ग्रीष्मकाल

विनोद कंजोलिया
Devendra SharmaIFM
* यदि आप विवाहित हैं तो ग्रीष्मकाल में अपनी पत्नी को (बच्चों सहित) उसके मायके जरूर भेजें। ताकि उसके माँ-बाप को यह न लगे कि आप पत्नी को बंधन में रखने वाले अत्याचारी किस्म के दामाद हैं। इधर आप चैन की साँसें ले लें।

* पत्नी जब मायके जाए, तो आप दो में से कोई एक काम कर सकते हैं। या तो उसके विरह में कुछ गीत-ग़ज़ल लिखकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध कर सकते हैं। या फिर अपने अंदर छिपे प्रेमी को जगाकर एक छोटा-मोटा, 'रिस्कलेस' और सुफलदायी प्रेम कर सकते हैं।

* हमारी संस्कृति में अतिथि सत्कार की महान परंपरा है। इसे लुप्त न होने देने के लिए आप अतिथि बनकर इस मौसम में मित्रों,
रिश्तेदारों के यहाँ जाएँ, मगर सावधान! अतिथि बनने का कोई भी अवसर उन्हें न प्रदान करें।

* गर्मी में बहस और गर्मा-गर्मी से बचें। सदा प्रसन्न रहें और उधार माँगने वालों से दूर रहें।

* गर्मी में जन्मदिन या विवाह आदि अवसरों पर उपहार देना ही पड़ जाए, तो हाथ पंखा, सुराही और नल की टोंटियों जैसे अभिनव
उपहार देकर भीड़ से अलग नज़र आएँ।
लेखक के बारे में
WD