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तमिल सिनेमा के 'स्क्रीनप्ले किंग' के. भाग्यराज का निधन, 73 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

K Bhagyaraj Passes Away
तमिल फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे स्क्रीनप्ले और मध्यमवर्गीय पारिवारिक मनोरंजन फिल्मों के लिए मशहूर दिग्गज निर्देशक, स्क्रीनराइटर और अभिनेता के. भाग्यराज का 73 साल की उम्र में निधन हो गया है। खबरों के अनुसार उन्हें सुबह अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
 
के. भाग्यराज के निधन की खबर मिलते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह अपने पीछे पत्नी, बेटे अभिनेता शांतनु भाग्यराज और बेटी सरन्या भाग्यराज को छोड़ गए हैं।
भाग्यराज अपनी उम्र के इस पड़ाव में भी सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में काफी सक्रिय थे। अभी कुछ ही दिन पहले उन्हें गोवा में अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर की बेटी की शादी में देखा गया था, जहां उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के अपने पुराने साथियों के साथ खुशनुमा वक्त बिताया था। 
 
सहायक से 'स्क्रीनप्ले किंग' बनने का सफर
तमिलनाडु के इरोड जिले में जन्मे के. भाग्यराज ने सिनेमा की दुनिया में अपनी शुरुआत दिग्गज फिल्म निर्माता भारतीराजा के सहायक के रूप में की थी। उन्होंने '16 वायथिनिले' (1977) और 'किझक्के पोगुम रेल' जैसी फिल्मों में सहायक के रूप में काम किया और संवाद लिखे।
 
साल 1979 में उन्होंने फिल्म 'सुवरिल्लाधा चिथिरंगल' से बतौर निर्देशक कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। भाग्यराज ने अपने करियर में 25 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया और 75 से अधिक फिल्मों में शानदार अभिनय किया।
आम आदमी को बनाया 'सिनेमा का हीरो'
जिस दौर में सिनेमाई पर्दे पर लार्जर-दैन-लाइफ हीरो का दबदबा था, उस दौर में भाग्यराज ने चश्मा पहनने वाले, साधारण और मध्यमवर्गीय युवक को अपनी फिल्मों का नायक बनाया। उनकी फिल्मों की ताकत शारीरिक बनावट नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता, तीखा व्यंग्य और ज़मीनी भावनाएं होती थीं। अंधा 7 नाटके, मुंधानई मुदिचू और थूरल निनू पोचू जैसी उनकी फिल्में आज भी फिल्म स्कूलों में स्क्रीनप्ले राइटिंग के लिए एक बेहतरीन केस स्टडी मानी जाती हैं।
 
अमिताभ बच्चन से खास कनेक्शन
भाग्यराज का जादू सिर्फ दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने साल 1986 में आई अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'आखरी रास्ता' का निर्देशन किया था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डबल रोल निभाया था, जबकि श्रीदेवी, जया प्रदा और अनुपम खेर भी मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके अलावा उन्होंने अनिल कपूर और श्रीदेवी स्टारर फिल्म 'मिस्टर बेचारा' (1996) और 'पापा द ग्रेट' (2000) जैसी हिंदी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं भी निभाईं।
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