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आगे होता है क्या ?

वेबू काका एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट
- महेन्द्र सांघ

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वेबू- काका, एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के यूएई के साथ भारतीय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ाती हुई शुरू हुई। स्टार बल्लेबाज सहवाग, जिनसे इस मैच में दोहरे तक की अपेक्षा थी, वे शून्य पर अपना विकेट गवाँ बैठे। इस तरह की कमजोर शुरुआत क्या निराशाजनक नहीं है?

काका- बिलकुल नहीं है। हम भारतीय 'अंत भला तो सब भला' में विश्वास करते हैं। शुरुआत चाहे जैसी हो, मैच यदि हमारी झोली में रहा तो सब ठीक है।

वेबू- काका, मगर इतनी कमजोर टीम के सामने हमारे बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आएँ, इसे देश के करोड़ों दर्शक कैसे पचाएँ?

काका- वेबू, भारतीय दर्शकों की तुम बिलकुल चिंता न करो। वे ऐसी स्थितियों के आदी हैं। वे तुलसी व पार्वती को महीनों रोते हुए झेल लेते हैं। इस आशा में कि वे एक दिन के लिए हँसेंगी, खुश होंगी। भारतीय जनता संघर्ष करने वालों के साथ ही रहती है। अक्सर जनता का नारा होता है कि 'अमुकजी' संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।

वेबू- काका, मगर बाद में भारतीय पारी को हमारे मिस्टर रिलायबल राहुल द्रविड़ ने क्या खूब संभाला। क्या शानदार शतक मारा। वाकई उनकी जोड़ का खिलाड़ी मुझे नजर नहीं आता!

काका- उनकी जोड़ के कई खिलाड़ी हैं। बिना जोड़ अर्थात पार्टनर के क्रिकेट में कोई भी खिलाड़ी एक मिनट भी विकेट पर नहीं ठहर सकता। जैसे ही दसवाँ खिलाड़ी आउट होता है, ग्याहरवाँ खिलाड़ी खुद-ब-खुद पैवेलियन लौट जाता है। इस तरह से टीम के सभी खिलाड़ी राहुल की जोड़ के हैं। जितनी देर वे विकेट पर टिके, उतनी देर बाकी खिलाड़ी भी मिलकर टिके।

वेबू- काका, यूएई के गेंदबाज अहमद का कमाल था कि उन्होंने मि. रिलायबल को क्लीन बोल्ड कर दिया!

काका- इसमें अहमद भाई का कोई कमाल नहीं था। आखिरी मैच की चार गेंदें शेष थीं और मि. रिलायबल ने अहमद की गेंद को अहमक की तरह खेला और इसीलिए बोल्ड हो गए।

वेबू- काका, ये सचिन कभी-कभी बेवक्त आउट हो जाया करते हैं, जैसे कि आज, क्यों?

काका- वेबू, उन्होंने मैनेजमेंट की किताब में पढ़ लिया है कि आप सफलता पा सकते हैं, बशर्ते आप दूसरों की, वे जो चाहते हैं, उसे पाने में उनकी मदद करें। बस कभी-कभी वे विपक्षी टीम को अवसर दे देते हैं और इसीलिए देखिए वे सबसे सफल भी हैं।

वेबू- काका, तारीफ करना पड़ेगी भारतीय गेंदबाजों की, जिन्होंने यूएई की टीम को सस्ते में समेट कर अपनी धाक जमा दी।

काका- ठीक कहते हो तुम। मगर अभी तो शुरुआत है। देखना है कि आगे होता है क्या।