Father’s Day Poem: फादर्स डे पर स्पेशल कविता
Father's Day 2023
पिता नींव घर की
एक पिता बेटों को पाले
बचपन यौवन सभी संभाले।
उंगली थामे सबका प्यार
गोदी-गोदी लाड दुलार
किलकारी जो उसकी गूंजे
पूरा घर सुनने तैयार ।
आते हर संकट को टाले।
बीते बचपन आए जवानी
हर पल बनती नई कहानी,
शिक्षा के पूरे होते ही
रोजगार की खींचातानी।
सही राह भी खोज निकाले।
घनी धूप में जैसे छाया,
सूने-सूने घर में आखिर
किसको अकेला रहना भाया
पांव में ना पडने दे छाले।
पिता नींव घर की कहलाते
दुखदर्दों मे जो सहलाते,
घोर उदासी मायूसी में
मुस्काकर सबको बहलाते।
भले ही बादल छाएं काले।
सबको आना सबको जाना
नहीं किसी का यहां ठिकाना,
बुरे वक्त मे साथ निभाना
पिता ने अच्छे से पहचाना।
सबका जीवन उसके हवाले
वर्तमान कुछ भटक गया है
गलत राह पर अटक गया है
वृद्ध अकेले रह गए देखो
बोझ समझ के पटक गया है
दे जाता है कोई निवाले।
एक पिता बेटों को पाले
बचपन यौवन सभी संभाले। - प्रदीप नवीन
