शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. दिवस विशेष
  3. पुण्यतिथि
  4. Chandra Shekhar Azad Shaheed Diwas
Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 (12:53 IST)

Chandra Shekhar Azad: आजाद शहीद दिवस, जानें महान क्रांतिकारी के बारे में 10 अनसुने तथ्य

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायक चंद्रशेखर आजाद का बेहतरीन फोटो
Chandra Shekhar Azad Biography: चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था। उनका बचपन का असली नाम शिवराम सिंह था। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक क्रांतिकारी नेता के रूप में उभरे। उनके नेतृत्व में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) ने कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया।
 
चंद्रशेखर आजाद ने 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आजाद के साथियों ने उनकी निर्भीकता और देश के प्रति उनकी निष्ठा को हमेशा याद किया है। 
 
'दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे!' - चंद्रशेखर आजाद
 
  • 'आजाद' नाम कैसे पड़ा?
  • संस्कृत के विद्वान थे आजाद
  • भेष बदलने में माहिर
  • निशानेबाजी का अद्भुत हुनर
  • झांसी में गाड़ी चलाना सीखा
  • अपनी पिस्तौल का नाम 'बमतुल बुखारा'
  • 'आजाद' रहने की वह आखिरी प्रतिज्ञा
  • उनकी माता की गरीबी और स्वाभिमान
  • 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन'
  • पुलिस भी उनके शव के पास जाने से डरती थी
 
'आजाद शहीद दिवस' पर, भारत के सबसे महान क्रांतिकारी के बारे में ये 10 अनसुने और रोचक तथ्य आपको गर्व से भर देंगे:
 

1. 'आजाद' नाम कैसे पड़ा?

मात्र 15 साल की उम्र में जब उन्हें गिरफ्तार कर जज के सामने पेश किया गया, तो उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और घर का पता 'जेल' बताया था। क्रुद्ध जज ने उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी, पर हर कोड़े पर उन्होंने 'वंदे मातरम' का नारा लगाया।
 

2. संस्कृत के विद्वान थे आजाद

बचपन में उनके पिता उन्हें संस्कृत का विद्वान बनाना चाहते थे, इसलिए उन्हें पढ़ाई के लिए काशी/ वाराणसी भेजा गया था। वे न केवल हथियारों के उस्ताद थे, बल्कि वेदों और संस्कृत व्याकरण के भी जानकार थे।
 

3. भेष बदलने में माहिर

आजाद भेष बदलने की कला में इतने निपुण थे कि ब्रिटिश पुलिस उन्हें पहचान ही नहीं पाती थी। वे काफी समय तक झांसी के पास ओरछा के जंगलों में 'ब्रह्मचारी' के रूप में साधु बनकर रहे और वहां के बच्चों को पढ़ाया भी।
 

4. निशानेबाजी का अद्भुत हुनर

क्रांतिकारी दल में उन्हें 'क्विक सिल्वर' कहा जाता था क्योंकि वे बहुत फुर्तीले थे। उनकी निशानेबाजी इतनी सटीक थी कि वे अंधेरे में भी आवाज सुनकर सही निशाना लगा सकते थे। वे पिस्तौल की सफाई और गोलियों के रख-रखाव के प्रति बहुत सख्त थे।
 

5. झांसी में गाड़ी चलाना सीखा

जब क्रांतिकारी आंदोलन को गति देने के लिए गाड़ियों की जरूरत पड़ी, तो आजाद ने झांसी में मोटर मैकेनिक का काम करते हुए गुपचुप तरीके से गाड़ी चलाना सीखा था, ताकि जरूरत पड़ने पर वे खुद गाड़ी चलाकर साथियों को निकाल सकें।
 

6. अपनी पिस्तौल का नाम 'बमतुल बुखारा'

आजाद अपनी प्रिय कोल्ट पिस्तौल को 'बमतुल बुखारा' कहते थे। वे हमेशा कहते थे कि यह पिस्तौल कभी किसी अंग्रेज के हाथ नहीं लगेगी, और उन्होंने अपना यह वचन मरते दम तक निभाया।
 

7. 'आजाद' रहने की वह आखिरी प्रतिज्ञा

27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क में जब वे चारों तरफ से घिर गए और उनकी पिस्तौल में सिर्फ एक गोली बची, तो उन्होंने पुलिस की गोली से मरने के बजाय अपनी प्रतिज्ञा पूरी की और खुद को गोली मार ली। वे जीते जी कभी पकड़े नहीं गए। उनका संकल्प था कि वे कभी भी जिंदा गिरफ्तार नहीं होंगे। उनके जनेऊ या पवित्र धागा पहनने का तरीका उनकी संस्कृति के प्रति प्रेम दर्शाता था।
 

8. उनकी माता की गरीबी और स्वाभिमान

आजाद की शहादत के बाद उनकी मां जगरानी देवी अत्यंत गरीबी में रहीं। कई लोगों ने उनकी मदद करनी चाही, लेकिन उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि "मेरे बेटे ने देश के लिए जान दी है, मैं किसी का एहसान लेकर उसके बलिदान को छोटा नहीं करूंगी।"
 

9. 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA)

भगत सिंह और आजाद की जोड़ी ने क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा दी। आजाद ने न केवल संगठन का नेतृत्व किया, बल्कि काकोरी कांड और सांडर्स वध जैसी बड़ी घटनाओं की पूरी प्लानिंग भी की थी। वे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों के मार्गदर्शक रहे।
 

10. पुलिस भी उनके शव के पास जाने से डरती थी

शहादत के बाद भी अंग्रेज पुलिस घंटों उनके पार्थिव शरीर के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी। उन्हें डर था कि कहीं 'आजाद' कोई चाल न चल रहे हों या वे अभी भी जीवित हों।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Vinayak Damodar Savarkar: वीर सावरकर की क्या है कहानी, जानें उनका योगदान