किसानों ने दिल्ली के उप राज्यपाल के साथ की ऑनलाइन वार्ता, ज्ञापन सौंपा

पुनः संशोधित शनिवार, 26 जून 2021 (20:50 IST)
नई दिल्ली। किसान नेताओं ने शनिवार को दिल्ली के के साथ ऑनलाइन माध्यम से बातचीत की। इससे पहले किसान नेताओं ने दावा किया कि उन्हें बैजल से मुलाकात करने और किसानों के प्रतिनिधि द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित 3 नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग वाला ज्ञापन सौंपने की अनुमति नहीं दी गई।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि किसानों ने सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन से राजभवन तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने किसानों के विरोध मार्च करने की आशंका के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा इंतजाम शनिवार को कड़े कर दिए।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को उपराज्यपाल से मुलाकात की इजाजत नहीं दी गई और उन्हें पकड़कर वजीराबाद पुलिस प्रशिक्षण केंद्र ले जाया गया। उन्होंने कहा कि बाद में उपराज्यपाल के साथ ऑनलाइन संक्षिप्त बैठक कराई गई और उनके प्रतिनिधि को एक ज्ञापन सौंपा गया।

भारतीय के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा, ज्ञापन में केंद्र के नए कृषि कानूनों को वापस लेने और उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाला एक नया कानून बनाने की मांग की गई है। इससे पहले आंदोलन शुरू करने के बाद से किसानों के प्रदर्शन को सात महीने पूरे होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से सैकड़ों किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। इनमें से अधिकतर ट्रैक्टर पर सवार होकर आए थे।

दिल्ली और हरियाणा के बीच सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन शुरू करने के बाद से शनिवार को किसानों के प्रदर्शन को सात महीने पूरे हो जाएंगे। राष्ट्रीय राजधानी की दो और सीमाओं टीकरी और गाजीपुर में भी किसानों ने डेरा डाला हुआ है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि भारी संख्या में प्रदर्शनकारी किसानों के एकत्र होने की संभावना के मद्देनजर धरनास्थल पर पर्याप्त पुलिसबल की तैनाती की गई थी। मुरादाबाद से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह पिछले सात महीने से आंदोलन से जुड़े हुए हैं और जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा, टिकैत साहब ने हमसे कहा है कि सरकार से मांगें मनवाने तक हमें खासतौर पर हर महीने की 26 तारीख को प्रयासों में तेजी लानी होगी। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की खबरों को शनिवार को फर्जी बताया। पुलिस ने बताया कि इस तरह की फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस उपायुक्त (पूर्व) प्रियंका कश्यप ने ट्वीट किया, फर्जी खबर! राकेश टिकैत की गिरफ्तारी से संबंधित खबर झूठी है। कृपया ऐसी फर्जी खबरों/ट्वीट से दूर रहें। इस तरह की झूठी खबरें/ट्वीट फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने भी बताया कि टिकैत को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

मलिक ने कहा, पुलिस ने टिकैत को गिरफ्तार नहीं किया था। वह अब भी गाजीपुर में विरोध स्थल पर हैं, जहां कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। विरोध स्थल पर संघर्ष की कोई स्थिति नहीं है।वहीं दिल्ली मेट्रो ने शनिवार को चार घंटों के लिए यलो लाइन पर अपने तीन मुख्य स्टेशनों को बंद करने का फैसला किया था।
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डीएमआरसी ने शुक्रवार रात को ट्वीट किया, दिल्ली पुलिस की सलाह पर सुरक्षा वजहों के मद्देनजर यलो लाइन पर तीन मेट्रो स्टेशन विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस और विधानसभा शनिवार को सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक जनता के लिए बंद रहेंगे।
दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे 40 किसान संघों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में कहा, किसानों के प्रदर्शन के सात महीने पूरे होने और 1975 में भारत में आपातकाल लागू होने के 46 साल बाद ‘खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ दिवस’ शनिवार को पूरे भारत में मनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत में हजारों किसानों ने शनिवार को अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन राज्यपालों को सौंपने के लिए राज भवनों तक रैलियां निकालीं। मोर्चा ने आरोप लगाया कि मार्च के दौरान देशभर में उनके सदस्यों को हिरासत में लिया गया। मोर्चा ने कहा कि एकजुटता के तौर पर अमेरिका के मैसाच्युसेट्स में भी ऐसी ही एक रैली निकालने की योजना बनाई गई थी।

बयान में कहा गया है कि बीकेयू प्रमुख राकेश टिकैत के नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर और सिसौली से हजारों किसान गाजीपुर गेट पहुंचे। गेहूं, गन्ना, आम, सेब, दाल, धान, ज्वार और अन्य फसलें उगाने वाले किसानों का प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी है।(भाषा)



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