क्या है नौकरशाही में लेटरल एंट्री, इसे लेकर क्यों छिड़ी है राजनीतिक बहस?
- मोदी सरकार ने 2018 में औपचारिक तौर पर लेटरल एंट्री शुरू की थी
- यह नौकरशाही में एक तरह की सीधी भर्ती होती है
- सरकार अनुभवी लोगों को नियुक्त करती है
- 3 से 5 साल या इससे अधिक समय के लिए हो सकती है भर्ती
- इसके लिए UPSC ने निकाला था विज्ञापन, जिसके बाद उठा विवाद
जानते हैं क्या है लेटरल एंट्री विवाद और क्यों उठ रहे हैं इस पर सवाल।
UPSC का लेटरल एंट्री का विज्ञापन : केंद्र सरकार ने ऊंचे पदों पर अधिकारियों की भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला है। सरकार के इस विज्ञापन पर विपक्षी तो सवाल उठा ही रहे हैं, यहां तक कि एनडीए घटक दल के नेता भी मोदी सरकार से इसे लेकर सवाल पूछ रहे हैं। एनडीए घटक दल के नेता इसमें आरक्षण की मांग करने लगे हैं। बता दें कि विपक्ष ने लोकसभा का चुनाव आरक्षण के मुद्दे पर लड़ा था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यदि नरेंद्र मोदी की सरकार तीसरी बार बन गई तो देश में आरक्षण खत्म कर देगी। ऐसे में अब नौकरशाही में लेटरल एंट्री को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
क्या था यूपीएसी का विज्ञापन: ये विज्ञापन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 17 अगस्त को 'लेटरल एंट्री भर्ती' को लेकर निकाला है। इस विज्ञापन में कहा गया कि विभिन्न मंत्रालयों में संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के 45 पदों पर जल्द ही विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। शासन की सुगमता के लिए नई प्रतिभाओं को शामिल करने के लिए मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत यह भर्ती होगी।
क्या है लेटरल एंट्री : दरअसल, लेटरल एंट्री को सीधी भर्ती भी कहा जता है। इसमें उन लोगों को सरकारी सेवा में लिया जाता है, जो अपनी फील्ड में काफी माहिर होते हैं। ये IAS-PCS या कोई सरकारी A लेवल के कैडर से नहीं होते हैं। इन लोगों के अनुभव के आधार पर सरकार अपने नौकरशाही में इन्हें तैनात करती है। इसमें 3 से 5 साल के लिए लोगों को रखा जाता है। काम के आधार पर आगे भी रखा जा सकता है। मोदी सरकार ने 2018 में औपचारिक तौर पर लेटरल एंट्री शुरू की थी। इसके पहले 2005 में UPA सरकार ने दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन किया था। इसमें बताया गया कि मंत्रालयों में कुछ पदों पर स्पेशलाइजेशन की जरूरत है। ये नियुक्ति लेटरल एंट्री से कराई जाएगी। इसमें कोई आरक्षण प्रक्रिया लागू नहीं होती है।
मनमोहन सिंह की भी थी लेटरल एंट्री : बता दें कि यूपीएसी की ओर से जो विज्ञापन निकाला गया है। ये कोई पहली बार नहीं है। इसके पहले की सरकारें भी ऐसे ही विज्ञापन निकाल कर लेटरल एंट्री के जरिए पदों पर भर्ती किया करती थीं। लेटरल एंट्री से ही पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, योजना आयोग (नीति आयोग) के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलुवालिया और सैम पित्रौदा की भी लेटरल एंट्री के जरिए ही नौकरशाही का जिम्मा दिया गया था।
Edited by Navin Rangiyal

