Trump Iran Ultimatum: क्या दुनिया एक बहुत बड़े विनाश की ओर बढ़ रही है? क्या खाड़ी के देशों से उठने वाला धुंआ अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाला है? ऐसे ही कई सवाल पूरी दुनिया को डरा रहे हैं। दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एक छोटी सी चिंगारी महाविनाश का कारण बन सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को '10 से 15 दिनों' का आखिरी अल्टीमेटम थमा दिया है कि या तो सरेंडर करो या फिर अंजाम भुगतो। लेकिन, इस बार ट्रंप का रास्ता कांटों भरा है। रूस और चीन की जुगलबंदी ने ईरान को 'अभेद्य' किला बना दिया है, वहीं अमेरिका के सबसे पुराने दोस्त ब्रिटेन ने ऐन मौके पर हाथ पीछे खींचकर सबको चौंका दिया है। क्या ट्रंप अपने ही बुने जाल में फंस गए हैं?
अमेरिका को रूस की खुली चेतावनी
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट तौर पर अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर नया हमला किया गया तो इसके गंभीर और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। ईरान, रूस और चीनी नौसेना के युद्धाभ्यास को भी अमेरिका के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह 'ट्रायंगल' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
हालांकि ट्रंप भी अपनी धमकियों से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि उसके पास परमाणु समझौते पर सहमति बनाने के लिए केवल 10 से 15 दिन का समय है। ट्रंप ने यह भी कहा कि या तो समझौता होगा या फिर ईरान के लिए स्थिति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगी।
विशेषज्ञों की मानें तो ट्रंप का लक्ष्य अब ईरान में केवल 'सत्ता परिवर्तन' नहीं, बल्कि 'सामरिक समर्पण' कराना है। इस बीच, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने दूसरे विमानवाहक पोत की तैनाती कर दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका 'सीमित सैन्य हमले' कर सकता है ताकि ईरान को बातचीत के लिए मेज पर लाया जा सके। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन 'गोल्डन डोम' नामक एक अभेद्य मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसे ईरान जैसे देशों के खतरों को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
खामनेई ने उड़ाया ट्रंप का मजाक
हालांकि ऐसा लग नहीं रहा कि ट्रंप की धमकियों का ईरान पर बहुत ज्यादा असर हो रहा है। खामेनेई ने ट्रंप की धमकियों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन करने में कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय प्रभाव पर कोई सीमा स्वीकार नहीं करेगा।
खामेनेई ने अमेरिकी दबाव को 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' करार दिया। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची साफ कर दिया है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नहीं छोड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान अमेरिका ने संवर्धन को शून्य करने की मांग नहीं की थी। अरागची ने चेतावनी दी कि अमेरिका की सैन्य धमकियां राजनयिक समाधान को और मुश्किल बना देंगी।
ट्रंप को ब्रिटेन ने दिया झटका
खास बात यह है कि ट्रंप ईरान के साथ अपनी लड़ाई में अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि यूरोपीय देशों से भी उन्होंने संबंध बिगाड़ लिए हैं। इस बीच, ब्रिटेन ने उन्हें ऐसा झटका दिया है, जिसकी ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। ब्रिटेन ने मेडागास्कर के पास के इलाकों का इस्तेमाल करने से अमेरिका को साफ इनकार कर दिया है। वही ब्रिटेन जो हर जंग में अमेरिका के कंधे से कंधा मिलाकर चलता था, उसने अब अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ब्रिटेन अब अमेरिका की उस 'आक्रामक नीति' का हिस्सा नहीं बनना चाहता जो दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक दे! ऐसा लग रहा है कि ट्रंप अपने ही बुने जाल में फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। ईरान को वे धमकियां दे सकते हैं, लेकिन सीधे हमले की 'रिस्क' संभवत: नहीं लेंगे क्योंकि इस हमले में यदि ईरान ने अमेरिका का थोड़ा-सा भी नुकसान कर दिया तो पूरी दुनिया में ट्रंप की किरकिरी हो जाएगी। अमेरिका में भी उन्हें जवाब देना भारी पड़ जाएगा। शायद ट्रंप भी इन बातों को अच्छी तरह समझते हैं। इसीलिए उन्होंने ईरान को 10-15 दिन का समय दिया है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala