Eid | ईद का दिन : इनाम का दिन
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रमजान-उल मुबारक माह के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद दुनिया भर के मुसलमानों के लिए खुशी का दिन है। इस्लाम में दो ही खुशी के दिन हैं, ईद-उल फितर और ईद उल जुहा। रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद ईद-उल फितर मनाई जाती है। ईद अल्लाह से इनाम लेने का दिन है।
इस मुबारक दिन सुबह के वक्त शहर भर का लोग ईदगाह में जमाकर होकर ईद की नमाज अदा करते हैं। नमाज के पहले हर मुसलमान के लिए फितरा देना फर्ज है। फितरे के तहत प्रति इंसान पौने दो किलो अनाज या उसकी कीमत गरीबों को दी जाती है। इसका मकसद यह है कि गरीब भी ईद की खुशी मना सकें।
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ईद के दिन की सुन्नतें-
- सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने के खुद की सफाई और कपड़े वगैरह तैयार रखना।
- गुस्ल (नहाना) करना।
- मिस्वाक (दातून) करना।
- सबसे उम्दा और साफ कपड़े पहनना। (नए या पुराने, लेकिन साफ)
- इत्र लगाना (सिर्फ पुरुष)।
- ईदगाह जाने से पहले कुछ खाना।
- नमाज से पहले फितरा, जकात अदा करना।
- ईदगाह में जल्दी पहुँचना।
- ईद की नमाज खुले मैदान में अदा करना। (बारिश या बर्फ गिरने की स्थिति में नहीं)
- ईदगाह आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करना।
ईदगाह जाते वक्त यह तकबीर पढ़ना। अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, लाइलाहा इल्ललाह, अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, वलिल्लाहिलहम्द। (अल्लाह बड़ा है, अल्लाह बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। अल्लाह बड़ा है, अल्लाह बड़ा है। सारी तारीफें अल्लाह के लिए हैं।)
