आज के युवा और त्योहार ईद का...
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काश! दिन 48 घंटे का होता
जावेद बताते हैं कि ईद पर मैं सबके साथ नमाज अदा करता हूँ। इसके बाद मैं अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर पर जाकर सबको ईद की मुबारकबाद देता हूँ। शाम तक बधाइयों का दौर इसी तरह चलता रहता है। ईद के दिन मुझे लगता है कि काश दिन 48 घंटे का होता।
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24 वर्षीय अजीम कहते हैं कि ईद के रोज अपने दिन की शुरुआत नमाज पढ़ने के साथ करता हूँ। नमाज अदा करने के बाद मैं अपने सारे दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर ईद मनाता हूँ। मुझे लगता है रमजान के आते ही बंदा खुद ही नमाज पढ़ने लगता है। यही है इस त्योहार का जादू, जो हमें बार-बार नेकी की राह दिखाता है।
ट्रेडिशनल वियर और सेवइयाँ
इरफान मुल्ली का कहना है कि ईद पर बनने वाली सेवइयाँ मुझे बहुत पसंद हैं। ईद तो मैं वैसे ही मनाता हूँ, जैसे बचपन से मनाता आ रहा हूँ। हर साल मेरे नए दोस्त बनते हैं और वो भी मेरे साथ ईद की खुशियों में शामिल हो जाते हैं। कुल मिलाकर ईद का त्योहार मेरे लिए दोस्तों के साथ मिलकर खुशियाँ बाँटने का एक जरिया है। इसके साथ ही उन मूल्यों को भी स्वयं में आत्मसात करने की कोशिश करता हूँ, जो ईद की मूल भावना के साथ जुड़े हैं।
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