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COVID-19 के डेल्टा Plus वेरिएंट के क्या हैं नए लक्षण, एक्सपर्ट से जानिए
Delta Plus Variant
-सुरभि भटेवरा
भारत में कोरोना वायरस की दूसरी काफी भयावह रही है। 18 वर्ष से अधिक आयु और 45 वर्ष से अधिक आयु वालों पर इसका काफी गहरा असर रहा है। लेकिन यह वेरिएंट क्या है? कैसे बार-बार और तेजी से म्यूटेंट हो रहा है। जिसे डायग्नोस करना एक बहुत बड़ा चैलेंज साबित हो रहा है। दूसरी लहर में डेल्टा वेरियंट को बड़ी वजह बताया गया है और अब डेल्टा प्लस वेरिएंट सामने आया है। वेबदुनिया ने बदलते वायरस को लेकर अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में सीनियर साइंटिस्ट डाॅ. सुस्मित कोस्टा से चर्चा की।
आइए जानते हैं क्या कहा -
डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है?
शुरू से हमने कोविड को देखा है यह स्पाइक प्रोटीन में होता है। यह इंसान के अंदर जाकर कोशिकाओं में संक्रमण को फैलाता है। और वायरस की टेंडेंसी होती है वह बदलाव करता रहता है। पहले डेल्टा अल्फा था B.1.617.1। इसके बाद दूसरी लहर आई। जिसमें डेल्टा वेरिएंट देखा गया जो बहुत ज्यादा प्रभावी रहा। डेल्टा वेरिएंट B.1.617.2 भी रहा। नया डेल्टा वेरिएंट 63 म्यूटेंट के साथ आ रहा है। वहीं अब नया म्यूटेशन कोड हो रहा है। उसका नाम है K 417n।
जब हम किसी म्यूटेशन की बात करते हैं वह एंटीजन किस लोकेशन पर म्यूटेंट हो रहा है और जिनोमिक म्यूटेशन किस जगह पर हुआ है वह एक नंबर होता है। उसका प्रोटीन सीक्वेंस क्या है वह कैसे म्यूटेंट करता है। तो उसे प्री और पोस्ट के आधार पर विश्लेषण करते हैं।
डेल्टा वेरिएंट की बात की जाए तो वैक्सीन उस पर असरदार है। साथ ही जिन्हें कोविड हुआ है उनमें एंटीबॉडी बन गई है उन पर भी। पर जो नया म्यूटेशन आ रहा है और जो एंटीबॉडी अंदर बनी है वह कितनी असरदार है उस पर रिसर्च जारी है।
अगर एंटीबाॅडी नए वेरिएंट के सामने काम नहीं करती है तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ेगा। हालांकि अभी इसके केस कम ही सामने आए है। आज के वक्त नए वेरिएंट को पहचानने के लिए अधिक से अधिक सीक्वेंसिंग करने की जरूरत है। सीक्वेंसिंग की मदद से डायग्नोस करके जल्द से जल्द उपचार शुरू किया जा सकता है।
भारत में सीक्वेंसिंग को लेकर किस तरह की तैयारी है?
भारत में बहुत कम सीक्वेंसिंग है। अधिकतर पुणे, नई दिल्ली में है। हालांकि मप्र में अभी अनुमति नहीं दी गई है लेकिन सेम्स में जल्द ही सीक्वेंसिंग शुरू की जा सकती है। इसकी मदद से वैरियंट्स को देखने में आसानी हो जाएगी। वर्तमान में एनआईवी पुणे में ही अधिकतम सीक्वेंसिंग हो रही है।
भारत में बहुत कम सीक्वेंसिंग है। अधिकतर पुणे, नई दिल्ली में है। हालांकि मप्र में अभी अनुमति नहीं दी गई है लेकिन सेम्स में जल्द ही सीक्वेंसिंग शुरू की जा सकती है। इसकी मदद से वैरियंट्स को देखने में आसानी हो जाएगी। वर्तमान में एनआईवी पुणे में ही अधिकतम सीक्वेंसिंग हो रही है।
डेल्टा प्लस वेरिएंट तीसरी लहर है?
यह संभावना हो सकती है। वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी बनती है। जिससे कोई बीमारी शरीर में आती है तो उससे लड़ सकते हैं। अपने अंदर एंटी बाॅडी विकसित हो गई है और नया वायरस है उस पर काम नहीं करता है तो यह तीसरी लहर बन सकती है। हालांकि इस पर अभी गहन रिसर्च जारी है। तो पहले से नहीं कहा जा सकता है कि नए वायरस पर एंटीबॉडी काम कर रही है या नहीं।
यह संभावना हो सकती है। वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी बनती है। जिससे कोई बीमारी शरीर में आती है तो उससे लड़ सकते हैं। अपने अंदर एंटी बाॅडी विकसित हो गई है और नया वायरस है उस पर काम नहीं करता है तो यह तीसरी लहर बन सकती है। हालांकि इस पर अभी गहन रिसर्च जारी है। तो पहले से नहीं कहा जा सकता है कि नए वायरस पर एंटीबॉडी काम कर रही है या नहीं।
डेल्टा प्लस वेरिएंट बाॅडी के किन हिस्सों को अधिक प्रभावित करता है?
यह श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी ट्रैक) और पेट में इंफेक्शन (जीआई ट्रेक) को ज्यादा प्रभावित करते हैं।
यह श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी ट्रैक) और पेट में इंफेक्शन (जीआई ट्रेक) को ज्यादा प्रभावित करते हैं।
बच्चों पर भी प्रभावी रहेगा?
बच्चों की एंटीबॉडी स्ट्रांग रहती है। जो भी म्यूटेशन हो रहा है बच्चे उसे एडोप्ट कर लेते हैं। अगर वह नए वेरिएंट एडॉप्ट नहीं करते हैं तो कहीं न कहीं यह नया वेरिएंट खतरनाक हो सकता है। लेकिन अभी रिसर्च जारी है। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि वह बच्चों पर कितना प्रभावी रहेगा।
बच्चों की एंटीबॉडी स्ट्रांग रहती है। जो भी म्यूटेशन हो रहा है बच्चे उसे एडोप्ट कर लेते हैं। अगर वह नए वेरिएंट एडॉप्ट नहीं करते हैं तो कहीं न कहीं यह नया वेरिएंट खतरनाक हो सकता है। लेकिन अभी रिसर्च जारी है। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि वह बच्चों पर कितना प्रभावी रहेगा।
डेल्टा प्लस वेरिएंट में किस तरह की सावधानी रखें?
लोग यहीं नहीं सोचे की वैक्सीन लग गया है तो उन्हें कुछ नहीं होगा। अभी रिसर्च जारी है। एंटीबॉडी आपके अंदर विकसित हुई और वह एंटीजन उस पर काम नहीं करता है तो रिइंफेक्ट भी हो सकता है। मास्क पहने, सोशल डिस्टेंसिंग रखें। क्योंकि कोविड ट्रांसफार्म बीमारी है। इम्यूनिटी पर भी निर्भर करता है। जिसकी प्रतिरोधक क्षमता कम है उनके लिए घातक साबित हो सकती है।
लोग यहीं नहीं सोचे की वैक्सीन लग गया है तो उन्हें कुछ नहीं होगा। अभी रिसर्च जारी है। एंटीबॉडी आपके अंदर विकसित हुई और वह एंटीजन उस पर काम नहीं करता है तो रिइंफेक्ट भी हो सकता है। मास्क पहने, सोशल डिस्टेंसिंग रखें। क्योंकि कोविड ट्रांसफार्म बीमारी है। इम्यूनिटी पर भी निर्भर करता है। जिसकी प्रतिरोधक क्षमता कम है उनके लिए घातक साबित हो सकती है।
