ग्वादर पर गदर, मोदी का दोहरे मोर्चे पर लड़ाई का इरादा

Last Updated: सोमवार, 22 अगस्त 2016 (14:51 IST)
सरकारी तंत्र के साथ ही देश के बहुसंख्यक पंजाबी लोगों के साथ भी उनका रिश्ता नहीं बन सका। में भ्रष्टाचार, जातीय हिंसा और अलगावाद को लेकर संघर्ष है लेकिन पाकिस्तान इसे भारत की कारस्तानी बताता है। भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर बलूचिस्तान की अलगाववादी ताकतों को समर्थन और पैसा देने की बात कही जाती है।
भारत अब तक इससे इनकार करता आया है, लेकिन 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र होने के बाद नया मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और बलूचिस्तान के लोगों ने धन्यवाद दिया है। जाहिर है कि इस बयान के निहितार्थ निकाले जाएंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी एक बार कहा था कि देश की रक्षा नीति में सुरक्षात्मक हमला भी एक तरीका है और अगर दोबारा मुंबई जैसा हमला हुआ तो पाकिस्तान बलूचिस्तान खो देगा।
 
नवाब अकबर बुगती के पोते ब्राहमदाग बुगती पिछले कई सालों से स्वनिर्वासित हो कर स्विजरलैंड में रह रहे है। मौजूदा वक्त में उन्हें बलोच विरोध की सबसे बड़ी आवाज माना जाता है। बुगती ने एक वीडियो संदेश जारी कर भारतीय प्रधानमंत्री का आभार जताया है और आगे भी समर्थन की मांग की है। उधर पाकिस्तान का आरोप है कि भारत प्रशासित कश्मीर से ध्यान भटकाने के लिए भारत बलूचिस्तान का नाम ले रहा है।
 
बलूचिस्तान हिंसा और आग में जल रहा पाकिस्तान का प्रांत है। पाकिस्तान कहता है कि ये आग भारत ने लगाई है। लेकिन हकीकत क्या है? बलूचिस्तान और क्यों यहां के लोग पाकिस्तान के खिलाफ सालों से युद्ध कर रहे हैं? बलूचिस्तान पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है जो ईरान और अफगानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बंटा हुआ है। यहां के लोगों की प्रमुख भाषा बलोच या बलूची है। 1970 के दशक में बलूच राष्ट्रवाद का उदय हुआ। इसकी कुल आबादी एक करोड़ बीस लाख के आसपास है। इसमें 30 जिले और 65 विधानसभा की सीटें हैं। 
 
1944 में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता का विचार जनरल मनी के दिमाग में आया था और 1947 में ब्रिटिश इशारे पर इसे पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। लेकिन पिछले कुछ समय से बलूचिस्तान शियाओं की कत्लगाह बन गई है। सुन्नी मौलाना उन्हें मुसलमान मानते ही नहीं। उनके विरुद्ध फतवों की बौछार होती रहती है। जनवरी 2013 में एक संघर्ष में 120 शियाओं की हत्या कर दी गई थी।
 
बलोच जनता अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए कटिबद्ध है। पाकिस्तान में आपातकाल जैसी स्थिति है। इस हालत में यह प्रश्न बड़ी तेजी से पूछा जाने लगा है कि क्या पाकिस्तान में 1971 का पुनरागमन होगा? 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में जो परिस्थितियां पैदा हुई थीं वह बलूचिस्तान में तो नहीं लौटेंगी? भारत में पनाह लिए बलूच नेता बराज पुर्दली ने दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब किया है। 
 
एक टीवी चैनल से बातचीत में पुर्दली ने कहा कि पाकिस्तान आतंक और जिहादी गुटों की फैक्ट्री बन गया है। पाक बलूचिस्तान का दमन कर रहा है। पुर्दली के मुताबिक पाकिस्तान बलूचिस्तान में 25 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या कर चुका है। अब तक यहां 5 बड़े ऑपरेशन हुए हैं। पाक के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए बलूचिस्तान में कई हथियारबंद अलगाववादी दल सक्रिय हैं। इसमें बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और लश्कर ए बलूचिस्तान प्रमुख हैं।
 
बलूचिस्तान के साथ पाकिस्तान ने कैसा-कैसा अन्याय किया है,  इसकी बहुत लम्बी सूची है। पाकिस्तानी सेना के पूर्व सेनापति जनरल टिक्का खान ने बलोचों की सामूहिक हत्याएं की थीं। इसलिए आज भी वहां की जनता उन्हें 'बलोचों के कसाई' के नाम से याद करती है। बलोचों का अपहरण और हत्या पाकिस्तान में एक सामान्य बात है।
 
भारत जब भी कश्मीर में पाक समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाता है तो पाक बलूचिस्तान को मुकाबले के लिए खड़ा कर देता है। पुर्दली ने भारत से गुहार लगाई है कि भारत, यूएन में मुद्दा उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाता है। वह यहां की आजादी को लेकर बात करता है लेकिन वह खुद बलूचिस्तान में क्या कर रहा है, उसकी आवाज किसी ने नहीं उठाई है? 
 
बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर....
 



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