नक्सलियों का खतरनाक एजेंडा, 2050 तक लोकतंत्र का खात्मा...

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लेकिन, प्रश्न यह उठता है कि माओवादियों का एकमात्र और गुप्त एजेंडा आखिर है क्या? उनकी कार्य प्रणाली क्या है? कैसे उन्होंने आदिवासी, दलित, पिछड़े, जंगली इलाके में जन-असंतोष का फायदा उठाकर अपना इतना शक्तिशाली आधार बना लिया और क्या है उनका अंतिम लक्ष्य?

पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने भी इस बारे में चेताया है। पिल्लई के अनुसार अगले चार-पांच वर्षों में सरकार को पलटने का माओवादियों का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि माओवादियों से बरामद साहित्य के अनुसार वे अगले पचास साल में सत्ता पर नियंत्रण करने के लक्ष्य के तहत काम कर रहे हैं।

संदीपसिंह सिसोदिया|
यही नहीं माओवादियों के एक अहम दस्तावेज स्ट्रेटेजी एंड टेक्टिक्स ऑफ द इंडियन रिवोल्यूशन में बाकायदा कई चेप्टरों और ऐतिहासिक वृतांतों द्वारा विस्तार से भारत में 'क्रांति लाने' और युद्ध के सहारे सत्ता परिवर्तन की गाइड लाइन और तरीके बताए गए हैं। माओ के अनुयायियों के निशाने पर है भारत... आगे पढ़ें...



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