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क्या स्पेनिश फ्लू की तरह दो साल में खत्म होगा कोरोना, तीसरी लहर में किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने दुनियाभर में तबाही मचाई है और अब इसकी तीसरी लहर आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। एक आशंका बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने को लेकर भी है, जबकि हार्ट, बीपी, कैंसर वगैरह के मरीजों के लिए भी डॉक्टर्स लगातार सावधान रहने की सलाह जारी कर रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों द्वारा कहा जा रहा है कि यह स्पेनिश फ्लू की तरह दो साल में खत्म हो जाएगा, लेकिन उन लोगों को खासतौर से बचने की जरूरत है जिन्हें कई तरह की बीमारियां हैं।
किसे है खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में 50% लोग फुल इम्यूनाइज्ड हो चुके हैं यानी 50 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। लेकिन याद रखना है कि 50 परसेंट लोग इम्यून नहीं है। तो जिन लोगों को डायबिटीज है, हाइपरटेंशन है, किडनी की बीमारियां हैं, हार्ट की बीमारियां हैं, कैंसर है, ऐसे लोगों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। सबसे जरूरी है, वैक्सीन लगवाना।
हर्ड इम्यूनिटी से होगा खत्म?
दुनिया भर में कई आलेख प्रकाशित हो रहे हैं कि नया वेरिएंट लोगों में काफी तेजी से भर रहा है, इससे लोगों में कोरोना के प्रति इम्यूनिटी जेनरेट होगी और दुनिया हर्ड इम्यूनिटी के करीब पहुंच जाएगी। ऐसे में कोरोना का खात्मा हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि स्पेनिश फ्लू था, वह भी 2 साल में खत्म हुआ था। ऐसे ही वायरस खत्म होते हैं, वह वेरिएंट बनाते रहते हैं।
वेरिएंट जेनरल इम्यूनिटी के अगेंस्ट काम करते रहते हैं, तो वायरस अपनी ताकत खो देता है। जो लोग इम्यून हो जाते हैं, उनके प्रति वायरस का अटैकिंग नेचर कम हो जाता है। वह उतना घातक नहीं रहता। लेकिन जब तक यह खत्म नहीं होता, तब तक हमें और आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है।
कुछ विशेषज्ञों द्वारा कहा जा रहा है कि यह स्पेनिश फ्लू की तरह दो साल में खत्म हो जाएगा, लेकिन उन लोगों को खासतौर से बचने की जरूरत है जिन्हें कई तरह की बीमारियां हैं।
किसे है खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में 50% लोग फुल इम्यूनाइज्ड हो चुके हैं यानी 50 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। लेकिन याद रखना है कि 50 परसेंट लोग इम्यून नहीं है। तो जिन लोगों को डायबिटीज है, हाइपरटेंशन है, किडनी की बीमारियां हैं, हार्ट की बीमारियां हैं, कैंसर है, ऐसे लोगों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। सबसे जरूरी है, वैक्सीन लगवाना।
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वेरिएंट जेनरल इम्यूनिटी के अगेंस्ट काम करते रहते हैं, तो वायरस अपनी ताकत खो देता है। जो लोग इम्यून हो जाते हैं, उनके प्रति वायरस का अटैकिंग नेचर कम हो जाता है। वह उतना घातक नहीं रहता। लेकिन जब तक यह खत्म नहीं होता, तब तक हमें और आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है।
