राज्यसभा में उठा सवाल, कोविड से कितने लोगों की जान गई, कब खुलेगा रहस्य...

पुनः संशोधित मंगलवार, 20 जुलाई 2021 (15:41 IST)
नई दिल्ली। केंद्र पर कोविड-19 संबंधी आंकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्यसभा में दावा किया कि इस महामारी के प्रबंधन में सरकार पूरी तरह विफल रही है। राज्यसभा में विपक्ष के नता खड़गे ने सवाल किया कि क्या हमेशा यह रहस्य बना रहेगा कि कोविड से कितने लोगों की जान गई?
पर उच्च सदन में अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कोविड-19 के नतीजे इतने भयावह होंगे, इसका अनुमान नहीं था।

उन्होंने कहा कि देश इस महामारी की दूसरी लहर से गुजरा और कहा जा रहा है कि हम तीसरी लहर के मुहाने पर खड़े हैं। इस महामारी से मिले घाव कभी नहीं भरेंगे।
इस महामारी से निपटने में सरकार पर विफलता का आरोप लगाते हुए खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री समस्याएं सुलझाने में विफल रहे और स्वास्थ्य मंत्री को उन्होंने बलि का बकरा बना दिया।

उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगार, नौकरी-रोजगार जाना, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन न मिलना, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था का तबाह होना...। सरकार ने इस पर चिंता नहीं जताई। सरकार को विज्ञापन दिखाने में, लुभावनी बातें करने और उन्हें बार बार दोहराने में महारत हासिल है।
खड़गे ने सरकार पर झूठे आंकड़े जारी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि कोविड-19 महामारी से करीब चार लाख लोगों की जान गई। देश में 6,38,565 गांव हैं। अगर एक-एक गांव में इस महामारी ने 5-5 लोगों की भी जान ली है तो कोविड से मौत का आंकड़ा 31,91,825 होता है।

उच्च सदन में विपक्ष के नेता खड़गे ने कहा कि नोटबंदी की तरह ही लॉकडाउन की घोषणा भी रात को की गई। 24 मार्च की रात को की गई। इस घोषणा के बाद प्रवासी कामगार किस हद तक परेशान हुए, यह सबने देखा है। लॉकडाउन की घोषणा न केवल 8 से 15 दिन पहले की जानी चाहिए थी बल्कि प्रवासी कामगारों को उनके गंतव्य तक पहंचाने के लिए व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी। यह जिम्मेदारी सरकार की थी लेकिन वह विफल रही।
उन्होंने कहा कि अपने ही बनाए नियमों को तोड़ने का पूरा श्रेय इसी सरकार को जाता है। आपने कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने और उचित दूरी का पालन करने को कहा, लेकिन खुद इसका पालन नहीं किया। आप क्या कर रहे थे पश्चिम बंगाल और दूसरे चुनावी राज्यों में। जो नियम आपने बनाया उसे तोड़ने का श्रेय भी आपको ही जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपील की और लोगों ने थाली बजाई, दीया जलाया, खुद को घरों में कैद रखा लेकिन आपने उनका भरोसा तोड़ा। लोगों ने आप पर भरोसा जताया लेकिन आपने उनका भरोसा तोड़ा। उन्हें धोखा दिया। स्वास्थ्य मंत्री को आपने बलि का बकरा बनाया। प्रधानमंत्री जी अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेते। बलि का बकरा बनाते हैं।
खड़गे ने कहा कि कोरोना के कुप्रबंधन से ना सिर्फ लोगों की नौकरियां गई बल्कि अर्थव्यवस्था तबाह हुई। महंगाई बढ़ी। हमने लोगों के हाथों में पैसा देने को कहा था। खर्च के लिए लोगों को पैसा मिलेगा तभी वह बाजार से खरीददारी करेंगे। लेकिन हमारी इस सलाह को भी नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने कहा कि आप दावा कर रहे हैं कि इस साल दिसंबर तक पूरे देश का टीकाकरण पूरा कर लिया जाएगा लेकिन अभी तक सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों को ही टीकों की दोनों खुराक लगी है।



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