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Written By ND

कारपोरेट्‍स का तारणहार

कारपोरेट्‍स तारणहार कंपनी सेक्रेटरी
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एक बार एक तालाब में काँटा डालकर बैठे मछलीमार के काँटे में बहुत समय गुजर जाने के बाद भी कोई मछली नहीं फँसी। उसने सोचा कि कहीं मैंने काँटा गलत जगह तो नहीं डाल दिया। उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके काँटे के आसपास बहुत-सी मछलियाँ थीं।

उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी सारी मछलियाँ होने के बाद भी कोई मछली फँसी क्यों नहीं जबकि काँटे में दाना भी लगा है। वह इसका कारण सोच ही रहा था कि तालाब के किनारे रहने वाला एक मछुआरा उससे बोला- लगता है भैया, यहाँ पर मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो। इस तालाब की मछलियाँ अब काँटे में नहीं फँसतीं।

इस पर उसने हैरानी से पूछा- क्यों, यहाँ ऐसा क्या हुआ? मछुआरा- पिछले दिनों तालाब किनारे एक बहुत बड़े संत के प्रवचन हुए थे। उन्होंने यहाँ मौन की महत्ता बताई थी। यह उनके प्रवचनों का ही असर है कि उसके बाद जब भी कोई इन मछलियों को फँसाने के लिए काँटा डालकर बैठता है तो ये मौन धारण कर लेती हैं। अब जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं तो काँटे में फँसेगी कैसे?
  एक बार एक तालाब में काँटा डालकर बैठे मछलीमार के काँटे में बहुत समय गुजर जाने के बाद भी कोई मछली नहीं फँसी। उसने सोचा कि कहीं मैंने काँटा गलत जगह तो नहीं डाल दिया। उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके काँटे के आसपास बहुत-सी मछलियाँ थीं।      


दोस्तो, सही बात तो है कि जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे? यह बात उन व्यक्तियों को भी समझ लेना चाहिए जो अपनी बकबक करने की आदत के चलते स्थान और समय का ध्यान रखे बिना अपना मुँह खोलकर मुसीबत में फँस जाते हैं।

इस प्रतिस्पर्धी दौर में इस बात का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि न जाने कौन, कहाँ, कब अपना काँटा डाले आपको फँसाने के चक्कर में हो। जैसे ही आपने मुँह खोला कि आप फँसे। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए जरूरी है कि हम यह सीखें कि कब, कहाँ और कितना बोला जाए। इस गुण के कारण ही कई बार कम योग्य लोग भी अपने से अधिक योग्य लोगों की तुलना में उच्च पदों पर होते हैं और योग्य व्यक्ति अपनी सारी शक्ति उनकी आलोचना करने में ही खर्च करते रहते हैं।

यानी कह सकते हैं कि योग्य और सफल बनना है तो मौन की साधना करो। और इस साधना की शुरुआत के लिए आज से बेहतर दिन क्या होगा। आज मौनी अमावस्या है। आज का दिन तो है ही मौन व्रत धारण करने के लिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें कभी-कभी मौन भी रहना चाहिए।

इस दिन का एक और संदेश है कि हम यदि बोलें तो एक-दूसरे के लिए कटु की जगह मीठे वचन बोलें। वैसे भी किसी की बुराई करना हो तो कोई भी व्यक्ति घंटों बोल सकता है लेकिन प्रशंसा के लिए उसे अधिक शब्द ही नहीं मिलते और वह न चाहते हुए भी मौन हो जाता है।

इसके साथ ही अमावस्या प्रतीक है विपत्तियों व मुसीबतों रूपी अंधकार का। यानी जब आप मुसीबतों से घिरे हों तो मौन रहने में ही भलाई है, क्योंकि बोलने से ऊर्जा का क्षय होता है। ऐसे समय में मौन रहकर आप अपनी बैटरी को रीचार्ज कर सकते हैं और बाद में संचित ऊर्जा के जरिए मुसीबतों का सामना आसानी से कर सकते हैं।

दूसरी ओर, मौन का संबंध आपके भीतर से भी है। लोग अक्सर कहते हैं कि अपने गुण, अपनी क्षमता और प्रतिभा को पहचानो। यदि हम यह सब जानना-पहचानना चाहते हैं तो इसकी पहली सीढ़ी है मौन। मौन रहकर ही हम जान सकते हैं कि हम कौन और क्या हैं। मौन से ही हम अपनी सोच का दायरा बढ़ा सकते हैं।

वैसे मौन को रहस्यमय भी कहा गया है क्योंकि इसमें बहुत से रहस्य जो छिपे रहते हैं। वैसे यह आपके भीतर छिपे रहस्यों को उजागर ही करता है। कौन होगा जो इन रहस्यों को जानना नहीं चाहेगा। तो जानो। कैसे? मौन रहकर। क्या? पूछते हो कि मौन कैसे रखें?

इसमें क्या दिक्कत है। बस हो जाओ मौन। मौन होने की कोई विशेष विधि थोड़े ही है। मौन होकर देखो-सुनो अपने आसपास की घटनाओं को, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न हो। यदि एकांत में बैठे हों तो ज्यादा अच्छा। इस तरह अभ्यास करो मौन का।

पहले कम समय करो, धीरे-धीरे बढ़ाते जाओ। कुछ समय बाद आपको अपने सभी प्रश्नों के उत्तर मिलने लगेंगे, क्योंकि यह सभी तालों की चाबी है। यह आप पर निर्भर है कि आप इससे कितने रहस्यों के दरवाजे खोलते हैं। अब बस, मौन पर मौन नहीं रहा जा सका और मौन रखने के बाद भी इतना कह दिया। कलम से। कसम से।

वह यह प्रशिक्षण या तो व्यावसायिक प्रोग्राम पूर्ण होने पर या व्यावसायिक प्रोग्राम के साथ-साथ भी कर सकते हैं। इन 15 महीने के प्रशिक्षण के पूर्व उन्हें 5 दिन का एक ट्रेनिंग ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी पूरा करना होता है जो संस्थान द्वारा या संस्थान के चेप्टरों द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं।

प्रोफेशनल प्रोग्राम को पास करने के पश्चात एवं 15 महीने का प्रबंधकीय प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात 1 महीने का प्रशिक्षण (15 दिन का प्रशिक्षण) रॉक या स्टॉक एक्सचेंज में एवं 15 दिन की अनिवार्य प्रशिक्षण (एसएमटीपी) जरूरी है। जब विद्यार्थी व्यावसायिक प्रोग्राम पास करने के साथ-साथ या इसके पश्चात 16 महीनों के प्रशिक्षण पूर्ण कर लेता है तो वह इस संस्थान का सदस्य बन जाता है। (

एसोसिएट मेंबर) इस कोर्स को करने में 20000 से 25000 रु. का कुल खर्च (ट्यूशन फीस को छोड़कर) आता है जो इसके समकक्ष दूसरे कोर्स से कम है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार ज्यादा से ज्यादा इस कोर्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इस कोर्स में लड़कियों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही है, यह इसकी विशिष्टता को दर्शाता है।

प्रत्येक ऐसी कंपनी जिसकी चुकता अंशपूँजी 10 लाख या अधिक किंतु 2 करोड़ से कम हो, ऐसी प्रत्येक कंपनी को अनिवार्य रूप से प्रेक्टिसिंग कंपनी का सचिव का कंपनीज सर्टिफिकेट प्राप्त करना होता है। इससे कंपनी सचिव का कार्य और बढ़ जाता है।

कंपनी सचिव सदस्यता संस्थान को प्राप्त करने के पश्चात या तो खुद की प्रेक्टिस कर सकता है या वह नौकरी कर सकता है।

कंपनी सचिव का कंपनी में बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है, क्योंकि वह कंपनी कानून, प्रबंधन, वित्त तथा कॉर्पोरेट गवर्नेंस के विविध विषयों के सम्मिलित ज्ञान के साथ कंपनी तथा इसके निदेशक मंडल, शेयरधारकों, सरकार तथा अन्य एजेंसियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। कंपनी अधिनियम में यह प्रावधान है कि जिस कंपनी की चुकता अंशपूँजी 2 करोड़ या उससे ज्यादा है उस कंपनी को अपने यहाँ कंपनी सचिव की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करना है, जिसके पास इस संस्थान (आईसीएसआई) की सदस्यता है।

वर्तमान में कंपनी सचिव की माँग बहुत ज्यादा है एवं कंपनी सचिव की संख्या वर्तमान में लगभग 20000 है जो माँग के मुकाबले बहुत कम है। प्रत्येक कंपनी जिसे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग कराना है एवं लिस्टेड कंपनी में भी कंपनी सचिव का होना अनिवार्य है। कंपनी सचिवों की महत्ता को देखते हुए सरकार के अधीन कंपनी सचिवों को उच्च पदों पर आसीन किया जाता है एवं उनकी सेवाएँ ली जाती हैं।

स्रोत : नईदुनिया अवसर

कंपनी सचिव विभिन्न सेक्टरों में महारत हासिल कर चुके होते हैं, इसलिए ये विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करते हैं जैसे कंपनी मामलों के सलाहकार, कानूनी सलाहकार, वित्तीय सलाहकार, सर्विस टैक्स, सेल्स टैक्स, उत्पाद शुल्क कर सलाहकार आदि। वर्तमान में कंपनी सचिव समुदाय देश की आर्थिक प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। कंपनी सचिव हर क्षेत्र में निपुण होता है, चाहे वह बीमा क्षेत्र हो या वित्तीय क्षेत्र, वह हर क्षेत्र में अपनी निपुणता दिखाते हैं।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस एवं ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम ने कंपनी सचिव की उपयोगिता एवं माँग और बढ़ा दी है। क्योंकि कंपनी सचिव ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम से अच्छी तरह वाकिफ होता है। प्रत्येक लिस्टेट कंपनी, जो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होती है, उस कंपनी को धारा 49 कॉर्पोरेट गवर्नेंस का पालन करना होता है एवं कम्पलायंस अधिकारी की अनिवार्य नियुक्ति करना होती है, जो कंपनी सचिव संस्थान का सदस्य हो।

कंपनी सचिव आरओसी, सीएलबी, स्टॉक एक्सचेंज, आरबीआई, एमआरटीपीसी, कस्टम एंड एक्साइज, सेलटैक्स, सर्विस टैक्स, हाईकोर्ट एवं केपिटल मॉर्केट एवं अन्य सरकारी संस्थाओं के द्वारा बनाए गए नियमों का समय पर कम्पलीकेशन करते हैं। रोजगार के क्षेत्र में कंपनी सचिव के लिए अपार संभावनाएँ हैं और अब तो म्युचुअल फंडों, बीमा कंपनियों, उद्योगों, सरकारी विभाग एवं बड़े व्यावसायिक समूहों द्वारा सैकड़ों की तादाद में कंपनी सुविधा के लिए रोजगार के अवसर रहेंगे।

कंपनी सचिवों को रोजगार के अवसर काफी हैं, क्योंकि कंपनी सचिवों की संख्या माँग की तुलना में काफी कम है। कंपनी सचिव को पारिश्रमिक भी बहुत आकर्षित मिलता है जो 5 लाख वार्षिक से प्रारंभ होकर योग्यतानुसार 50 लाख वार्षिक तक भी पहुँच सकता है।

कंपनी सचिव संस्थान द्वारा सदस्यों के लिए कैम्पस इंटरव्यू भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे सीएस की परीक्षा पास करने के पश्चात रोजगार के अवसर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। सीएस एक ऐसा कोर्स है जिसके द्वारा स्वयं का ऑफिस खोलकर प्रेक्टिस करने तथा नौकरी करने के समान अवसर उपलब्ध हैं, जबकि अन्य कोर्सेस यह लचीलापन नहीं उपलब्ध कराते हैं। एक छात्र सीएस करके अपने विकास के साथ-साथ देश को आर्थिक दृष्टि से भी अन्य देशों की तुलना में अग्रिम पंक्ति पर खड़ा करने में अपना सर्वस्व प्रदान करता है।

(लेखक-आईसीएसआई के इंदौर चेप्टर के चेयरमैन हैं।)

स्रोत : नईदुनिया अवसर
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