सब भूल, जस्ट कूल!
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NDआज स्टूडेंट्स की लाइफ वास्तव में बहुत बिजी हो गई है। टफ कॉम्पटिशन और बेहतर करियर बनाने का उस पर भारी प्रेशर है। इसी प्रेशर में रहते हुए स्टूडेंट्स अपनी लाइफ में बेलेंस बनाने की कोशिश करता रहते हैं। कई बार वह मैनेज कर लेते हैं, कई बार नहीं कर पाते।
कॉलेज से लेकर कोचिंग क्लास के नोट्स से लेकर टेक्स्ट बुक, फैकल्टी के साथ लगातार डायलॉग, अपडेट रहने के लिए न्यूज पेपर्स, मैग्जीन्स पढ़ना और टीवी न्यूज चैनल्स देखना। इस बीच डाइट पर ध्यान देना, अपनी फिटनेस के लिए जिम जाना या घर पर एक्सरसाइज करना। और फिर यारी-दोस्ती निभाना। जाहिर है काम ही काम। लेकिन यह जरूरी भी है और कोई भी युवा इससे बच नहीं सकता। कुछ कर दिखाने की ख्वाहिश, परिवार और समाज का दबाव भी उसे लगातार मोटिवेट किए रहता है।
लेकिन इन तमाम कामों के बीच स्टूडेंट्स को यह याद रखना चाहिए कि वह अपने लिए, अपने शौक के लिए कुछ वक्त निकाले। इसका एक ही तरीका है। तमाम तनावों और परेशानियों, तमाम तरह के प्रेशर और एक्सपेक्टेशंस को कुछ देर के लिए भुला दिया जाए। पूरी तरह से। और पूरे दिन में कभी ऐसा वक्त निकाला जाए जिसमें सिर्फ अपने साथ रहा जा सके। सब कुछ भुला कर सिर्फ अपने में डूब जाना। इसके कुछ तरीके हो सकते हैं। इन्हें आजमा कर आप कूल रह सकते हैं। रिलेक्स महसूस कर सकते हैं और रिफ्रैश हो सकते हैं।
1. मनपसंद म्यूजिक सुनें। आप एआर रहमान को पसंद करते हैं या माइकल जैक्सन को। आप पंडित शिवकुमार शर्मा को पसंद करते हैं या नुसरत फतेह अली खान को। या फिर कोई इंस्ट्रूमेंटल एलबम। मधुर धुनों और बोलों में कुछ देर के लिए सब कुछ भुला दें।
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ND3. अपना मनपसंद टीवी सीरियल देखें, जिसे आप एन्जॉय करते हों। रब ने बना दी जोड़ी या मिले जब हम तुम। कभी-कभी कार्टून चैनल्स भी देखे जा सकते हैं। हो सकता है मिकी एंड डोनाल्ड की शरारत भरी हरकतें आपके चेहरे पर मुस्कराहट ला दें और आपका स्ट्रेस मिनटों में दूर कर दें।
4. इन दिनों कई म्यूजिक चैनल्स चौबीसों घंटे कुछ न कुछ सुनाते रहते हैं। इन पर आप कुछ गाने-देख सुन सकते हैं। कुछ गानों के रीमिक्स खासे लोकप्रिय हुए हैं। एमटीवी और वीएच-वन जैसे चैनल्स पर आप वेस्टर्न म्यूजिक का मजा भी ले सकते हैं और हिप-हॉप डांस का भी।
5. यदि आपको पेंटिंग या स्केचिंग में रुचि है तो सादे कागज पर रंग लगाएँ, अपनी कल्पना को आकार दें। कोई जरूरी नहीं कि आप आर्ट के बारे में जानते हैं कि नहीं। कई बार रंगों से खेलना ही तनाव सोख लेता है।
6. यदि आप कविताएँ लिखते हैं, डायरी लिखते हैं तो उसके लिए समय निकालें। जो भी आपके साथ हुआ, चाहे अच्छा या बुरा, उसे लिख लें। वह किसी भी माध्यम में हो सकता है। कविता, लघुकहानी, डायरी या बस यूँ ही टूटे-फूटे शब्दों में अपनी कोई बात। इससे न केवल मन हलका होगा बल्कि राहत भी महसूस करेंगे।
7. कभी शाम को यूँ ही अकेले टहलें। हवा को महसूस करें, ठंडी फुहारों को महसूस करें। शाम को जब मौसम खुला हो और आसमान में तारें हों तो उन्हें निहारें। प्रकृति का साथ भी राहत और सुकून देता है। अपनी खिड़की से सूर्यास्त देखें, पंछियों का घर लौटना देखें। उनकी आवाजें सुनें। ये छोटी-छोटी बातें कई बार जादुई असर करती हैं।
8. परिवार के साथ गप्पे लड़ाएँ, हँसी-मजाक करें। कितने दिनों से आपने अपने पेरेंट्स के साथ दो पल बैठकर बातें नहीं की होंगी। थोड़ा उनके साथ बैठें।
