क्या आप वाकई सबकुछ जानते हैं, अगर जानते हैं तो फिर आपने नए थॉट्स और इंफॉर्मेशन के लिए अपने दिमाग के सभी दरवाजे बंद ही कर दिए होंगे। आप अपने आपको ज्ञानवान बुद्धिमान और वह सबकुछ समझने लगे होंगे जो एक ज्ञानी व्यक्ति समझता है। इस कारण होता यह है कि आप नई वस्तुओं को जानने पहचानने के अलावा नए विचारों को अपने भीतर आने ही नहीं देते।
असफलता का कारण कई बार व्यक्ति एक ही जगह पर दस वर्ष निकाल देता है, उसे यथोचित प्रमोशन भी नहीं मिल पाता। वह सोचता जरूर है कि आखिर क्या कारण है कि वह आगे नहीं बढ़ पा रहा? क्या उसके प्रयत्नों में कमी है? क्या वह ठीक तरीके से काम नहीं कर पाता? क्या वह अपने क्षेत्र की नई जानकारियाँ नहीं रखता? इतना सोचने के बाद एक ही निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि व्यक्ति ने 'मैं पहले से ही जानता हूँ' का मंत्र अपनाया हुआ है। इस कारण नई जानकारियों को अपने तक पहुँचने ही नहीं देता।
इगो का सवाल यह सीधे रूप से इगो (अहं) से जुड़ा हुआ पाया गया है। व्यक्ति को लगता है कि वह इतना होशियार है कि सबकुछ जानता है। कोई युवा साथी उसे नई टेक्नोलॉजी या अन्य बातें बताने की कोशिश भी करता है, तब व्यक्ति उसे यह कह देता है कि वह सबकुछ जानता है। जबकि, असल में वह नहीं जानता। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति ऑफिस में आत्मकेंद्रित हो जाता है। उसके व्यक्तित्व पर इसका असर पड़ना आरंभ हो जाता है। उसके कामकाज पर भी इसका साफ असर देखने को मिलता है।
कंपनी द्वारा उसे रिफ्रेशर कोर्स में भेजने के बाद भी वह व्यक्ति अपने आपमें जब बदलाव नहीं करता, तब उसे ऐसे नकारात्मक निर्णय का सामना करना पड़ता है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होती है। इस समय तक काफी देर हो गई रहती है। तब व्यक्ति आत्मविश्लेषण करने बैठता है।
प्रेरणा कहीं से भी अपने आपको सदैव नया सीखने के लिए तैयार रखें। नया सीखने के लिए जरूरी नहीं कि आप अपने क्षेत्र की जानकारी से ही अपने आप को अपडेट रख सकते हैं। प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है। प्रेरणा अच्छी फिल्मों, प्रेरक प्रसंगों, सफल व्यक्तियों से मिलने से लेकर मजदूरी कर अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करने वाले मजदूर से भी मिल सकती है।
रोज डायरी लिखें कुछ नया करने के लिए कष्ट तो करना ही पड़ेंगे ... ज्यादा नहीं बस एक डायरी रखना है। दिनभर में जो कुछ भी नया देखें या सीखें उसे डायरी में नोट कर लें। कई बार आप अपने जूनियर से या सीनियर से कुछ सीख लेते हैं। हो सकता है उनसे बातचीत करने के दौरान कोई अच्छा शब्द मिल सकता या फिर कोई ऐसी बात या जानकारी हो जिसका उपयोग आप आगे कर सकते हैं।
कई जूनियर साथी बेहतरीन प्रेजेंटेशन बना सकते हैं, वे आधुनिक सॉफ्टवेयर के भी जानकार होते हैं। आप उनसे वह सीख सकते हैं। इसके अलावा रोजाना की जिंदगी में कई घटनाएँ होती हैं जिनसे छोटी-छोटी बातें सीखी जा सकती हैं, इसलिए अब से प्रतिदिन अपने आप से यह प्रश्न जरूर करें कि 'मैं क्या नया सीख सकता हूँ?'