बिहेव युवरसेल्फ
क्यों हैं इतने गुस्से में आप?
सभी कंपनियों के ऑफिस में इस तरह के लोग आसानी से मिल जाते हैं, जो 'एंगर एट वर्क' से ग्रसित रहते हैं। उनके गुस्से के कई कारण हो सकते हैं जिनमें सैलरी न बढ़ने से लेकर व्यक्तिगत कारण भी होते हैं। पर, इन कारणों से न केवल काम करने वाले बल्कि कंपनी को भी काफी फर्क पड़ता है। जानते हैं, 'एंगर एट वर्क' के क्या मायने हैं और यह कितना नुकसान पहुँचा सकता है। कंपनी के कारण गुस्सा अधिकांश कर्मचारियों के गुस्से का कारण कंपनी द्वारा तयशुदा ग्रोथ न देना, बॉस के साथ अनबन, बॉस का गुस्सैल होना तथा साथी कर्मचारी को ज्यादा इंक्रीमेंट मिलना आदि शामिल है। इस प्रकार कर्मचारी न केवल इस गुस्से को ऑफिस में प्रकट करता है, बल्कि वह इस गुस्से को घर तक ले जाता है। ग्रोथ में आती है रुकावट इस गुस्से के नतीजे काफी घातक होते हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति या तो सेल्फसेंटर्ड हो जाता है या फिर वह येन-केन प्रकारेण कंपनी को नुकसान पहुँचाने की प्रवृत्ति में शामिल हो जाता है। यह नुकसान कम काम करके या फिर जब कंपनी को जरूरत हो, तब छुट्टी आदि लेकर करने की कोशिश करता है। नतीजतन उसकी खुद की ग्रोथ में रुकावट आती है।इस तरह के गुस्से का असर कंपनी पर कम लेकिन गुस्सा करने वाले की सेहत पर ज्यादा पड़ता है। वह व्यक्ति साथियों के बीच अलग-थलग पड़ जाता है। नकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों से न केवल कंपनी बल्कि अन्य लोग भी दूर ही रहना चाहते हैं।बाहरी कारण कई बार काम का बोझ इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि कर्मचारी स्वयं की तरफ भी ध्यान नहीं दे पाता। इस कारण भी वह गुस्सा होता है। इसके अलावा कई बार व्यक्तिगत कारण जैसे परिवार में तनाव, बीमारी या किसी नजदीकी की मृत्यु हो जाने पर भी व्यक्ति काफी गुस्सैल हो जाता है।
कैसे करें गुस्से को काबू गुस्से को काबू करने के लिए व्यक्तिगत प्रयत्न ही सबसे ज्यादा कारगर होते हैं। इसके अलावा आप अपने मन में किसी बात को लेकर अपने विचारों के जाल बुनना आरंभ न करें। कई बार हम जल्दबाजी में ही अपनी गुस्सैल प्रतिक्रिया देते हैं और बाद में पता चलता है कि हम खुद ही गलत थे। इस कारण कंपनी संबंधित किसी भी प्रतिक्रिया को सार्वजनिक तौर पर देने से पहले थोड़ा सोच लें। कई बार सिचुएशंस हमारे बस में नहीं रहती और प्रॉब्लम इतनी क्रिटिकल रहती है कि हमारे गुस्सा करने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं रहता। इस बात को पहचानकर खुद को समझाएँ कि गुस्सा करने से प्रॉब्लम सॉल्व होने वाली नहीं है। गुस्से पर नियंत्रण का सबसे बेहतरीन तरीका है टॉक यानी बातचीत। अपने मन की बातों को अपने बॉस या अपने साथी या घर पर अपनी पत्नी या माता-पिता से भी शेयर करने से भी अपने गुस्से को काबू करने में बहुत मदद मिल सकती है। सबसे जरूरी बात, घर के गुस्से को ऑफिस में और ऑफिस के गुस्से को घर में ले जाना बंद करें। फिर देखिए अपने आप फर्क पड़ेगा।