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एहसानों को ना भूलें
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अनुराग तागड़े हम जिंदगी में तरक्की करते हैं और एक मुकाम पर पहुँचने के बाद जब अब तक की जिंदगी कैसी बीती इस पर नजर डालते हैं तब हमें स्वयं की मेहनत, परिश्रम नजर आते हैं, पर काफी कम लोग होते हैं, जो अपने परिवार और ऐसे लोगों को देख पाते हैं, जिनके कारण वे इस मुकाम पर पहुँचे हैं। एक बड़ी ही अच्छी और रोचक कहानी है। एक बड़ा परिवार रहता है, जिसमें माता-पिता और उनके 8 बच्चे रहते हैं। पिता दिनभर खदान में काम करते हैं, ताकि 10 सदस्यों वाले परिवार का पेट भर सकें। रहने के लिए भी ज्यादा बड़ा मकान नहीं रहता है। बावजूद इसके सभी आपस में काफी प्रेम भाव से रहते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं। परिवार के दोनों बड़े लड़कों को कला के प्रति काफी झुकाव रहता है और दोनों यह बात अपने पिता को भी बताते हैं। पिता उन्हें समझाते भी हैं कि चित्रकला की पढ़ाई काफी महँगी है और अकेला पैसा जुटा नहीं पाऊँगा। दोनों अपनी इच्छा को बनाए रखते हैं और थोड़े बड़े होने के बाद वे यह तय करते हैं कि दोनों में से एक खदान में काम करेगा और दूसरे की पढ़ाई का खर्च उठाएगा और पढ़ाई पूर्ण करने के बाद जो भी पैसा आएगा उससे फिर दूसरा पढ़ाई करेगा, पर पहले पढ़ाई करने कौन जाएगा इस बात को लेकर दोनों फिर विचार करने लगते हैं और तय होता है कि सिक्का उछाल कर निर्णय किया जाए कि कौन पहले जाएगा। नियत तारीख को दोनों भगवान को याद करके सिक्का उछालते हैं और दोनों में से एक पढ़ाई के लिए रवाना हो जाता है और दूसरा खदान की ओर रुख करता है। लगभग 5 वर्षों की अथक मेहनत के बाद चित्रकला की पढ़ाई करने वाला भाई न केवल अपने चित्रों के कारण प्रसिद्ध हो जाता है, बल्कि वह अच्छा पैसा कमाने भी लगता है। वह सफलता प्राप्ति के बाद गाँव में लौटता है। उसके आने की खुशी में गाँव में भोज का आयोजन होता है। सभी उसकी तारीफ करते हैं और वह अपने भाई-बहनों के लिए काफी उपहार भी लाता है और भोज के दौरान अपने उस भाई की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि भाई तुम्हारे समर्पण और त्याग की वजह से मैंने यह दिन देखा है। अब तुम्हारी बारी है, मैं तुम्हारा संपूर्ण खर्च उठाऊँगा।
यह सुनकर खदान में जाने वाला भाई बोलता है कि मैं अब नहीं जाऊँगा, मेरी इच्छा पूर्ण हो गई। तुम श्रेष्ठ चित्रकार बन गए हो, यही बहुत है। काफी मान-मनौव्वल के बाद भी जब भाई नहीं मानता तब चित्रकार भाई उसे 5 वर्ष पूर्व किए गए वादे की याद दिलाता है। बावजूद इसके खदान में जाने वाला भाई नहीं मानता। चित्रकार को समझ में नहीं आता आखिर बात क्या है? मेहमानों के चले जाने के बाद जब चित्रकार अपने भाई के पीछे जाता है और उससे पूछता है तब वह भाई अपने हाथ सामने करता है और कहता है कि खदान में इतने समय तक काम करने के कारण उसकी उँगलियाँ खराब हो चुकी हैं और उसे बीमारियों ने घेर लिया है। अब उससे हाथ में ब्रश भी पकड़ा नहीं जा सकेगा। अपने भाई की यह हालत देखकर चित्रकार भाई के आँखों में आँसू आ गए और दोनों गले लगकर रोने लगे। दोस्तों बाद में चित्रकार भाई ने अपने भाई के केवल हाथों के चित्र बनाए और उसे दुनिया के सामने रखा, जिसकी न केवल खूब तारीफ हुई, बल्कि काफी अच्छे दाम भी मिले। जिंदगी में हमारे लिए अनजाने में कई लोग सहायता करते हैं, जिन्हें हम भूल जाते हैं, पर दोस्तों परिवार के सदस्य और दोस्त हमारे लिए सबकुछ जानने के बाद सहायता करते हैं। इस कारण सफलता मिलने के बाद इन्हें न भूलें।