कुछ दिन पहले मेरी मुलाकात एक पुराने दोस्त से हो गई। बहुत अरसे बाद मिलना हुआ था, सो विस्तार से एक-दूसरे के बारे में पूछते रहे और दुनिया-भर की बातें कीं। वह दोस्त मनोवैज्ञानिक होने के साथ ही विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग भी करता है। सो मैंने उससे कहा, 'दो-चार अहम बातें इस संबंध में मुझे भी बता दो, ताकि मैं उन्हें मेरी पोती को बता सकूँ।' तब उसने कुछ बड़े ही काम की बातें बताईं। चलिए, आप भी इनका लाभ लीजिएः
समय की पाबंदी का अत्यधिक महत्व है, जबकि हमारे देश में इसका बहुत ही अनादर होता है। बड़े-बड़े नेता और कथित वीआईपी तो इसके सबसे ज्यादा दोषी होते हैं। लेटलतीफी किसी गुनाह से कम नहीं। यह ध्येय वाक्य याद रखें : 'यदि आप समय पर नहीं आ सकते, तो जल्दी आएँ।'
यदि आप विज्ञान के विद्यार्थी हैं, तो जानते ही होंगे कि पानी का रासायनिक फॉर्मूला है 'एचटूओ'। जल ही जीवन है और यह सबके लिए अति आवश्यक है। ऐसा ही एक और 'एचटूओ' बहुत जरूरी है। वह है 'हैल्थ-हैपीनेस, ऑप्टिमिज्म'। यानी स्वास्थ्य, प्रसन्नाता एवं आशावाद। ये तीन बातें सबमें और खास तौर पर युवाओं में तो जरूर होना चाहिए।
इसके लिए जरूरी है कि हम इन तीनों चीजों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करें। परिवार और समाज से लेकर प्रशासन तक सभी की यह जिम्मेदारी है।
'अंडे की किस्मत' का विचार बड़ा ही रोचक है। अंडे को फूटना तो होता ही है। बस, यह देखना होता है कि वह कैसे फूटता है। यदि वह बाहर से फूटता है, तो एक जीव नष्ट होता है लेकिन यदि वह अंदर से फूटता है, तो एक नए जीव का जन्म होता है। याद रखें, सृजनात्मकता हम सबमें अंदर से आना चाहिए।
स्वयं हममें इसकी अभिलाषा होना चाहिए। यह चीज बाहर से जबरदस्ती हममेें नहीं ठूँसी जा सकती। यदि ऐसी कोशिश की गई, तो इसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं।
बड़े सपने देखना, ऊँची महत्वाकांक्षा रखना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ शेखचिल्ली बनने से काम नहीं होता। सपने साकार करने के लिए कड़ी मेहनत भी जरूरी है। आलस्य छोड़ना पड़ता है। शारीरिक व मानसिक फुर्ति भी उतनी ही आवश्यक है।
अतः सपने जरूर देखें लेकिन यह भी याद रखें कि सपने साकार करने के लिए नींद से बाहर आना पड़ता है।