बैनर : वन मोर थॉट प्रोडक्शन निर्माता : आज़म खान निर्देशक : रामगोपाल वर्मा संगीत : अमर मोहिले कलाकार : सुदीप, अमृता खानविलकर, अहसास चन्ना, ज्योति सुभाष, अश्विनी कल्सेकर
जादू-टोना या काले जादू पर विश्वास करने और नहीं करने वालों के बीच एक अंतहीन बहस होती रहती है। कोई बुरी शक्तियों के वजूद को स्वीकारता है तो कोई नहीं। इसी बात को आधार बनाकर निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने नए कलाकारों को लेकर ‘फूँक’ बनाई है।
विचार
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हमारे बीच मौजूद कई लोगों के साथ कुछ ऐसी अनोखी घटनाएँ घटती हैं या अनुभव होता है, जिन्हें तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता। इनको लेकर हम ज्यादा तर्क-वितर्क नहीं कर सकते क्योंकि इनके बारे हमें ज्यादा ज्ञान नहीं होता। ये जिंदगी के छिपे हुए वे रहस्य हैं, जिनके बारे में हमें थोड़ा-सी जानकारी है।
‘फूँक’ की कहानी उठाए गए प्रश्न का जवाब आपसे पूछती है, भले आप जादू-टोने पर विश्वास करते हो या नहीं। यह पूछती है कि क्या करेंगे आप जब कोई आपका करीबी कुछ रहस्यमयी शक्तियों का शिकार हो जाए, जिन्हें मानने से आपका दिमाग इंकार करता है।
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कहानी राजीव एक सफल इंजीनियर है। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 8 और 10 वर्ष है। राजीव ईश्वर पर बिलकुल भी विश्वास नहीं करता है। वह भगवान के साथ-साथ उन लोगों से भी चिढ़ता है जिन्हें इस तरह की शक्तियों पर विश्वास है।
एक दिन उसके घर में एक दुष्ट आत्मा घुस जाती है, जो राजीव को उसका परिवार खत्म करने की धमकी देती है। इससे राजीव की बुनियादी सोच बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें