निर्माता : ईस्टर्न यूनियन एंटरटेनमेंट निर्देशक : निशा चैनानी कलाकार : प्रशांत चैनानी, बिक्रम सलूजा, मंदिरा बेदी, समीर दत्तानी, पूरब कोहली, नौहीन सरदार अली, दारा सिंह
जिंदगी में हम सभी अपने-अपने लक्ष्यों के पीछे दौड़ते रहते हैं। भागते रहते हैं। कोई प्यार के लिए दौड़ता है, तो कोई पैसों के पीछे। कोई शांति के लिए तो कुछ लोग मजे के लिए ही दौड़ लगाते हैं। इस दौड़ से भागा नहीं जा सकता। जिंदगी हमेशा फास्ट ट्रैक पर ही चलती है।
‘42 कि.मी.’ 5 लोगों की यात्रा है, जो अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए हुए हैं। वे खुशहाल जिंदगी जी रहे थे, लेकिन कई बार जिंदगी में ऐसा कुछ घटित हो जाता है कि हम उस स्थिति में पहुँच जाते हैं जिसकी कल्पना भी हमने नहीं की होती है। 42 किलोमीटर्स मैराथन में हिस्सा लेने के उनके अलग-अलग कारण हैं।
संजना (मंदिरा बेदी) एक गृहिणी है, जिसकी दुनिया उसका घर, दो बच्चे और पति तक ही सीमित है। जिंदगी उसके लिए फूलों की सेज थी, लेकिन जब उसे यह अहसास होता है कि वह अपनी पहचान खो बैठी है तो वह अपने आपको दोराहे पर खड़ा पाती है। क्या वह असली संजना को 42 किलोमीटर्स लंबी यात्रा में पहचान पाएगी?
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रवि आनंद (बिक्रम सलूजा) के लिए जिंदगी सिर्फ डील, प्रॉफिट और व्यवसाय है। काम और सफलता का नशा उस पर हर दिन सवार रहता है। अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जो उसे देश का सफल बिजनेसमैन बना देगा के सिवाय उसके पास किसी के लिए भी समय नहीं है। अपने निवेशकों से उसकी मुलाकात उसे ऐसी राह पर खड़ा कर देती है, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था। रवि कभी मुश्किलों को पीठ नहीं दिखाता। वह दौड़ने का फैसला करता है। 42 किमी. लंबी दौड़ में वह सिर्फ इसलिए हिस्सा ले रहा है ताकि निवेशकों को यह विश्वास बना रहे कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है।
राजू (पूरब कोहली) गाँव का रहने वाला है। इस किसान पुत्र की जिंदगी उसकी गर्लफ्रेंड सौमित्रा के इर्दगिर्द घूमती है। सौमित्रा के पिता राजू से उनकी बेटी की शादी से इसलिए इनकार कर देते हैं क्योंकि राजू की कोई हैसियत या पहचान नहीं है। राजू अपने आपको साबित करना चाहता है। राजू के कजिन को जब यह पता चलता है कि वह बहुत तेज भागता है तो वह उससे मैराथन में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।
संजीव (समीर दत्तानी) गोआ में रहने वाला एक फुटबॉल खिलाड़ी है। उसका एक ही गोल है- देश का सबसे बड़ा फुटबॉलर बनना, लेकिन जिंदगी को कुछ और ही मंजूर था। उसके साथ ऐसी घटना घटती है कि उसके सपने ध्वस्त हो जाते हैं। उसका आत्मविश्वास हिल जाता है। संजीव आसानी से हार मानने वालों में नहीं है। क्या वह अपना खोया आत्मविश्वास पा सकेगा?
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समीर (प्रशांत चैनानी) हैंडसम और चार्मिंग है। वो जो चाहता है पा लेता है। लड़कियों के बीच वह बेहद लोकप्रिय है। दिव्या नामक लड़की से जब वह मिलता है तो उसकी जिंदगी ही बदल जाती है। समीर ने सोचा भी नहीं था कि वह किसी से प्यार कर बैठेगा। उसे अपने आपको साबित करना है। क्या 42 किमी की यात्रा उसे अपना प्यार पाने में मदद करेगी?
मुंबई इंटरनेशनल मैराथन में हिस्सा लेने के बाद क्या उनकी जिंदगी में बदलाव आता है, जानने के लिए देखिए ’42 कि.मी.’।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें