29 दिसंबर को दिग्गज अभिनेता राजेश खन्ना की जयंती थी और इस मौके पर अभिनेत्री और सोशल एक्टिविस्ट सोमी अली ने उन्हें दिल से याद किया। सोमी के लिए यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस इंसान की याद है जिसने उनके बचपन के सपनों को दिशा दी और सिनेमा से उनका रिश्ता जोड़ दिया। कराची में पली-बढ़ी सोमी के लिए राजेश खन्ना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भावनाओं की पहली पहचान थे।
सात साल की उम्र में मिला सपना
सोमी अली ने बताया कि राजेश खन्ना उनके सबसे पसंदीदा अभिनेता थे। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में उनकी फिल्में देखनी शुरू कीं और वहीं से सिनेमा से प्यार हो गया। महज सात साल की उम्र में जब उनकी मुलाकात राजेश खन्ना से हुई, तो उन्होंने मासूमियत में कह दिया था कि वह उनसे शादी करेंगी। काका ने मुस्कराते हुए उनके माथे पर प्यार से किस किया, चॉकलेट दी और यह पल सोमी के दिल में हमेशा के लिए बस गया।
आराधना और मुमताज के साथ फिल्में रहीं खास
राजेश खन्ना की फिल्मों में से किसी एक को पसंदीदा चुनना सोमी के लिए मुश्किल है। फिर भी आराधना उनके दिल के बेहद करीब है, खासतौर पर शर्मिला टैगोर के साथ उनकी केमिस्ट्री की वजह से। वहीं मुमताज के साथ उनकी जोड़ी को वह बेहद खूबसूरत मानती हैं और मुमताज को उन्होंने पर्दे पर बेमिसाल बताया।
आनंद ने सिखाया दर्द में भी जीना
सोमी अली के मुताबिक फिल्म आनंद ने उन्हें यह सिखाया कि दर्द के बीच भी जिंदगी को पूरी तरह कैसे जिया जाता है। इस फिल्म के कई दृश्य आज भी उनकी आंखें नम कर देते हैं और मुस्कान भी दे जाते हैं। वहीं बावर्ची उनके लिए खुशियों की मिसाल है, जो दिखाती है कि इंसानियत और दयालुता पूरे परिवार को बदल सकती है। यही वजह है कि राजेश खन्ना की जयंती पर वह अक्सर बावर्ची देखती हैं।
खामोशी और मानसिक स्वास्थ्य की गहराई
सोमी ने खामोशी को अपने समय से काफी आगे की फिल्म बताया। उनके अनुसार इस फिल्म ने मानसिक स्वास्थ्य और देखभाल करने वालों की चुप पीड़ा को बेहद संवेदनशीलता से दिखाया। राजेश खन्ना और वहीदा रहमान की परफॉर्मेंस ने भावनात्मक दर्द को सच्चाई और करुणा के साथ पेश किया, जो आज भी उन्हें गहराई से छूता है।
एक ऐसा सुपरस्टार जो दोबारा नहीं आया
सोमी अली के अनुसार राजेश खन्ना का स्टारडम आज तक बेजोड़ है। वह पहले सच्चे मेगास्टार थे, जिनकी स्टाइल, मुस्कान और मौजूदगी ने एक अलग ही दीवानगी पैदा की। सोमी का मानना है कि काका ने ही उन्हें ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, फिल्ममेकिंग और साइकोलॉजी की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
बारिश में भीगती इंसानियत की मिसाल
सोमी ने एक निजी घटना भी साझा की, जो राजेश खन्ना की सादगी और इंसानियत को दर्शाती है। मुंबई में भारी बारिश के दौरान उनकी टैक्सी आशीर्वाद के पास खराब हो गई थी। राजेश खन्ना खुद बारिश में भीगते हुए बाहर आए, उन्हें अपनी कार में बैठाया और बिना किसी दिखावे के मदद की। यह पल सोमी के लिए उनकी विनम्रता की सबसे बड़ी पहचान है।
काका के गानों में आज भी जिंदा हैं भावनाएं
राजेश खन्ना की फिल्मों का संगीत आज भी सोमी को गहराई से छूता है। कहीं दूर जब दिन ढल जाए, जिंदगी के सफर में, ये शाम मस्तानी और चिंगारी कोई भड़के जैसे गाने उनके लिए समय से परे हैं, जिनमें हर भावना सच्ची और आत्मा से जुड़ी हुई लगती है।